राहुल गांधी से मुलाकात के बाद भी बेनतीजा रहे सिद्धारमैया
कर्नाटक कांग्रेस में चल रही आंतरिक कलह और मुख्यमंत्री की कुर्सी को लेकर मची खींचतान के बीच दिल्ली से इस वक्त की सबसे बड़ी राजनीतिक खबर सामने आ रही है।
नई दिल्ली। दिल्ली के इंदिरा भवन में कांग्रेस नेता राहुल गांधी और कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के बीच हुई हाई-प्रोफाइल वन-टू-वन बैठक के पहले दौर के बाद भी फिलहाल कोई ठोस नतीजा नहीं निकल सका है।
कर्नाटक में तीन साल का कार्यकाल पूरा कर चुकी कांग्रेस सरकार के भीतर मुख्यमंत्री की कुर्सी को लेकर चल रहा विवाद एक बार फिर दिल्ली की चौखट पर पहुंच गया है।
मंगलवार को कांग्रेस आलाकमान के बुलावे पर दिल्ली पहुंचे मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने लोकसभा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के साथ उनके चैंबर में बेहद अहम और गोपनीय मुलाकात की। हालांकि, करीब एक घंटे चली इस वन-टू-वन बैठक के पहले दौर के बाद भी फिलहाल कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आया है।
बैठक खत्म होने के बाद सीएम सिद्धारमैया आलाकमान के चैंबर से बाहर आकर उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के साथ बैठ गए, जिससे यह साफ संकेत मिल रहे हैं कि मामले को सुलझाने के लिए अभी मंथन का दौर लंबा खिंच सकता है।
राहुल गांधी के चैंबर में हुआ ‘सीक्रेट’ मंथन
सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली के इंदिरा भवन में आयोजित इस बैठक में राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया से अकेले में बातचीत की। इस दौरान कर्नाटक कांग्रेस के भीतर चल रही गुटबाजी, आगामी राज्यसभा और विधान परिषद चुनाव की रणनीति के साथ-साथ सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा—’नेतृत्व परिवर्तन’ पर चर्चा हुई।
बैठक खत्म होने के तुरंत बाद राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और संगठन महासचिव के.सी. वेणुगोपाल के बीच दोबारा से अलग बैठक शुरू हो गई है, जिससे राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज है।
इसे भी पढ़ें: जंतर-मंतर विवाद: रील मेकर्स और पत्रकारों की पहचान पर सुप्रीम कोर्ट में उलझी सरकार
दिल्ली में कर्नाटक के नेताओं का भारी जमावड़ा
इस हाई-प्रोफाइल मीटिंग की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि केवल मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री ही नहीं, बल्कि कर्नाटक सरकार के कई कद्दावर मंत्री और करीब 17 से अधिक विधायक भी दिल्ली के कर्नाटक भवन पहुंच चुके हैं।
बैठक से ठीक पहले सिद्धारमैया ने अपने खेमे के मंत्रियों—एम.बी. पाटिल, जी. परमेश्वर, भैरती सुरेश और सतीश जारकीहोली के साथ नाश्ते पर गुप्त रणनीति तैयार की थी। जब मीडिया ने मंत्री एम.बी. पाटिल से एजेंडे के बारे में पूछा, तो उन्होंने सिर्फ इतना कहा, “बैठक का असली एजेंडा क्या है, यह सिर्फ राहुल गांधी जी ही जानते हैं। चर्चा खत्म होने के बाद ही चीजें साफ हो पाएंगी।”
क्यों फंसा है पेच?
साल 2023 में जब कर्नाटक में कांग्रेस की भारी बहुमत से सरकार बनी थी, तभी से सिद्धारमैया और डी.के. शिवकुमार के बीच ‘ढाई-ढाई साल’ के पावर-शेयरिंग फॉर्मूले की अटकलें लगाई जा रही थीं।
शिवकुमार खेमे का दावा:
डी.के. शिवकुमार के समर्थक पिछले 18 महीनों से लगातार दावा कर रहे हैं कि अब शिवकुमार को कमान सौंपी जानी चाहिए क्योंकि सरकार अपने 3 साल पूरे कर रही है और 2028 के चुनावों के लिए नई ऊर्जा की जरूरत है।
सिद्धारमैया का मजबूत पक्ष:
सिद्धारमैया के पास फिलहाल 70 से अधिक विधायकों का समर्थन बताया जा रहा है। साथ ही, राज्य के पिछड़े वर्ग (OBC) और अल्पसंख्यकों के बीच उनकी मजबूत पकड़ को देखते हुए आलाकमान कोई भी ऐसा कदम उठाने से बच रहा है जिससे सरकार अस्थिर हो जाए।
Discover more from
Subscribe to get the latest posts sent to your email.
