परेड से पहले कदम पीछे: 15 जवानों ने दिया इस्तीफा
मुजफ्फरनगर/उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश पुलिस में भर्ती होकर खाकी पहनने का सपना देख रहे 15 युवाओं ने मंजिल के बेहद करीब पहुँचकर अपने कदम पीछे खींच लिए हैं। अपनी पासिंग आउट परेड (POP) से कुछ ही समय पहले, इन ट्रेनी कांस्टेबलों ने विभाग को अपना इस्तीफा सौंप दिया है।
इन युवाओं के इस्तीफे के पीछे किसी प्रकार का विवाद नहीं, बल्कि व्यक्तिगत और करियर से जुड़े कारण सामने आए हैं। इस्तीफा देने वाले अधिकांश युवकों ने स्वीकार किया कि वे पुलिस की कठोर ट्रेनिंग और अनुशासित जीवनशैली के साथ सामंजस्य नहीं बैठा पा रहे थे। उन्होंने लिखित में दिया कि वे खुद को इस सेवा के लिए “अनफिट” महसूस कर रहे हैं।
कुछ अभ्यर्थी ऐसे भी हैं जिनका चयन प्रशिक्षण के दौरान ही अन्य सरकारी सेवाओं (जैसे एसएससी या रेलवे) में बेहतर ग्रेड-पे पर हो गया है। कुछ युवाओं ने घर की आर्थिक स्थिति और व्यक्तिगत समस्याओं को त्यागपत्र का आधार बनाया।
नियमों के मुताबिक, यदि कोई प्रशिक्षु बीच में नौकरी छोड़ता है, तो उसे प्रशिक्षण के दौरान मिले वेतन और ट्रेनिंग पर हुए खर्च की भरपाई करनी पड़ती है। इन 15 युवाओं को अब ट्रेनिंग के दिनों के हिसाब से लाखों रुपये का हर्जाना विभाग को देना होगा।
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पुलिस प्रशासन के उच्चाधिकारियों के अनुसार, इन रंगरूटों को काफी समझाने और काउंसलिंग करने का प्रयास किया गया ताकि वे अपना निर्णय बदल सकें। हालांकि, युवाओं के अडिग रहने पर नियमानुसार उनके इस्तीफे की प्रक्रिया को आगे बढ़ा दिया गया है।
यह घटना उत्तर प्रदेश में हुई हालिया 60,000+ कांस्टेबल भर्ती प्रक्रिया के प्रशिक्षण के दौरान की है। अधिकारियों का कहना है कि इतने बड़े स्तर पर भर्ती में कुछ प्रतिशत लोग व्यक्तिगत कारणों से अक्सर नौकरी छोड़ देते हैं, जिसे ‘एट्रिशन’ कहा जाता है।
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