बंगाल में 33 लाख वोटर के लिए सिर्फ 19 ट्रिब्यूनल अब सुप्रीम कोर्ट सख्त

बंगाल में 33 लाख वोटर के लिए सिर्फ 19 ट्रिब्यूनल अब सुप्रीम कोर्ट सख्त

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार की सुनवाई में इस बात पर फोकर किया की ट्रिब्यूनल कितने मामलो का निपटारा कर रहे हैं

नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से बाहर किए जाने और अपीलीय ट्रिब्यूनलों में मामलों की सुनवाई की धीमी रफ्तार को लेकर विवाद सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है।

11 अगस्त को भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी की रिट याचिका पर सुनवाई की। याचिका में ट्रिब्यूनल द्वारा मामलों के निपटारे की प्रक्रिया को तेज करने के लिए निर्देश देने की मांग की गई थी।

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार की सुनवाई में इसी बात पर फोकस किया

पश्चिम बंगाल में SIR प्रक्रिया के बाद बाहर हुए लोगों के नाम दोबारा शामिल कराने के लिए 19 अपीलीय ट्रिब्यूनल बनाए गए हैं, जिनकी अध्यक्षता पूर्व हाईकोर्ट जज कर रहे हैं। हालांकि, करीब 33-34 लाख लंबित अपीलों में से जुलाई तक महज 30 हजार मामलों का ही निपटारा होने के कारण कलकत्ता हाईकोर्ट ने पहले टिप्पणी की थी कि इस रफ्तार से बैकलॉग खत्म होने में लंबा समय लग सकता है।

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार की सुनवाई में इसी बात पर फोकस किया कि ट्रिब्यूनल कितने मामलों का निपटारा कर रहे हैं, कितने घंटे काम कर रहे हैं और उनकी वास्तविक डिस्पोजल रेट क्या है। कोर्ट ने चुनाव आयोग से अब तक निपटाई गई अपीलों का पूरा डेटा मांगा है।

अदालत के सामने उठा एक नया मुद्दा

अदालत के सामने यह मुद्दा भी उठाया गया कि दूरदराज के इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए ट्रिब्यूनल तक पहुंचना आसान नहीं है, जिससे प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। याचिकाकर्ता की ओर से यह भी कहा गया कि नाम कटने और अपील लंबित होने के कारण लोगों को राशन जैसे कल्याणकारी लाभ मिलने में भी परेशानी हो रही है, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि PDS का मुद्दा एक अलग कानूनी मामला है जिसके लिए हाईकोर्ट का रुख किया जा सकता है।

सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल ट्रिब्यूनल के फैसलों के लिए कोई डेडलाइन तय करने से इनकार कर दिया है, लेकिन जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने जोर दिया कि सिर्फ अपील का अधिकार मिलना काफी नहीं है, यदि फैसले के लिए लंबा इंतजार करना पड़े तो पूरी प्रक्रिया की प्रभावशीलता पर सवाल उठता है। इस मामले पर अब 25 अगस्त को अगली सुनवाई होगी।


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Sanjana Kumari

संजना कुमारी: रियल-टाइम खबरों पर मजबूत पकड़ रखने वाली डिजिटल कंटेंट क्रिएटर और पत्रकार, जो सामाजिक-राजनीतिक, क्षेत्रीय और सांस्कृतिक घटनाक्रमों को डिजिटल दर्शकों के लिए सटीक व आकर्षक बनाती हैं