एआई और सोशल मीडिया के दौर में व्यक्तित्व अधिकारों के लिए कोर्ट का रुख कर रहे है अभिनेता
एआई और सोशल मीडिया के दौर में अपनी फोटो, वीडियो गलत इस्तेमाल न हो इस लिए फिल्मी सितारे अपने व्यक्तित्व अधिकारों को लेकर काफी सतर्क हैं इस लिए अदालत का रुख कर रहे हैं
मुंबई: र्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और सोशल मीडिया के इस दौर में डीपफेक और मॉर्फ्ड कंटेंट का खतरा लगातार बढ़ रहा है।
तकनीक के जरिए तस्वीरों, वीडियो और आवाज के गलत इस्तेमाल से फिल्मी सितारों की प्रतिष्ठा दांव पर लग रही है, जिसके चलते अब कई बड़े कलाकारों ने अपने व्यक्तित्व अधिकारों (Personality Rights) की सुरक्षा के लिए अदालत का रुख किया है।
जान्हवी कपूर को मिली राहत
हाल ही में अभिनेत्री जान्हवी कपूर ने अपने व्यक्तित्व अधिकारों की रक्षा के लिए दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।
उन्होंने 5,000 से अधिक वेबपेज, सोशल मीडिया पोस्ट, एआई-जनरेटेड पोर्नोग्राफिक कंटेंट, फर्जी अकाउंट और चैटबॉट्स को हटाने की मांग की थी।
न्यायमूर्ति अनूप जयराम भांभानी ने मामले की सुनवाई करते हुए जान्हवी से जुड़े अश्लील और पोर्नोग्राफिक ऑनलाइन कंटेंट को हटाने का अंतरिम आदेश दिया है।
हालांकि, अदालत ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हवाला देते हुए फैन पेज हटाने से इनकार कर दिया है। इस मामले की अगली सुनवाई 17 अगस्त को होगी।
इसे भी पढ़ें: ईशान आनंद बने BSP के मुख्य प्रभारी, 10 सितंबर को आकाश पर फैसला
तब्बू, प्रीति जिंटा और अन्य सितारों का कड़ा कदम
इससे पहले अभिनेत्री तब्बू ने भी दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, जिस पर कोर्ट ने उनके नाम, तस्वीर या आवाज के बिना अनुमति व्यावसायिक इस्तेमाल पर रोक लगाते हुए डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को आपत्तिजनक व डीपफेक कंटेंट तुरंत हटाने के निर्देश दिए थे।
इसके अलावा प्रीति जिंटा, अभिषेक बच्चन, ऐश्वर्या राय, ऋतिक रोशन, करण जौहर, अक्षय कुमार, कुमार सानू और अक्किनेनी नागार्जुन जैसे कई दिग्गज कलाकार भी अपनी छवि की रक्षा के लिए कोर्ट की शरण ले चुके हैं।
आमिर खान, रश्मिका मंदाना और रणवीर सिंह के भी डीपफेक वीडियो पहले वायरल हो चुके हैं, जिसके बाद सितारों ने इस पर कड़ी चिंता जताई है।
क्या होते हैं व्यक्तित्व अधिकार?
आसान शब्दों में कहें तो अपनी आवाज, चेहरे, नाम या अन्य व्यक्तिगत पहचान पर अपना कानूनी अधिकार होना ही ‘व्यक्तित्व अधिकार’ है। पब्लिक फिगर होने के कारण फिल्मी सितारे अक्सर ऐसे फर्जी विज्ञापनों या एआई छेड़छाड़ का शिकार बन जाते हैं।
बिना अनुमति ऐसे प्रतीकों का इस्तेमाल करना और छवि को नुकसान पहुंचाना कानूनी अपराध की श्रेणी में आता है।
Discover more from
Subscribe to get the latest posts sent to your email.
