ईशान आनंद बने BSP के मुख्य प्रभारी, 10 सितंबर को आकाश पर फैसला
लखनऊ: बसपा में आकाश की जगह ईशान को राजनीति में लाने की मायावती की रणनीति के पीछे Gen-Z युवा वोटरों को वजह माना जा रहा है। सके जरिए मायावती ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि बहुजन समाज पार्टी में अब युवा नेतृत्व को बढ़ावा दिया जा रहा है।
पार्टी ने यह साफ़ बयान किया है कि संगठन में युवा नेताओं को आगे बढ़ाया जा रहा है। इसके साथ हीआकाश को हटाए जाने के कारण समर्थकों में जो नाराज़गी पैदा हुई थी उसे कम करने की भी कोशिश की गई है। क्योंकि आकाश युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय हो रहे थे।
कई पदाधिकारियों का बढ़ा कद
मायावती ने पार्टी के कई बड़े नेताओं की ज़िम्मेदारियाँ बढ़ाकर उनका कद और मज़बूत कर दिया है। हाल ही में बसपा से बाहर निकाले गए रणधीर सिंह बेनीवाल की पार्टी में वापसी हो गई है, और उन्हें दोबारा सहारनपुर, पंजाब, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर का प्रभारी इंचार्ज बना दिया गया है।
इसी तरह नेशनल कोआर्डिनेटर रामजी गौतम और लालाराम को भी कई दूसरे राज्यों का काम सौंपा गया है। इसके अलावा, विपुल कुमार को हरियाणा का नया प्रभारी बनाया गया है।
सक्रिय राजनीति में कदम रखने से पहले ईशान आनंद अपने पिता आनंद कुमार का बिजनेस संभाल रहे थे। उन्होंने अपने बड़े भाई आकाश आनंद की तरह ही लंदन से अपनी पढ़ाई पूरी की है।
करीब 27 साल के ईशान को मायावती ने पिछले साल अपने जन्मदिन के मौके पर सबसे मिलवाया था, जिसके बाद से ही उनके राजनीति में आने की चर्चाएं शुरू हो गई थीं। ईशान की शादी पिछले साल 24 अप्रैल को नोएडा के एक बिजनेसमैन की बेटी राधिका खन्ना से हरियाणा में हुई थी, जिसमें खुद मायावती भी शामिल हुई थीं।
मायावती ने अपने छोटे भतीजे ईशान आनंद को मुख्य सेक्टर प्रभारी बनाकर बड़ी जिम्मेदारी दी है। ईशान को उत्तर भारत के ज्यादातर राज्यों का जिम्मा सौंपा गया है, जहां वे संगठन के काम की जांच कर सीधे मायावती को रिपोर्ट करेंगे।
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इस बड़े बदलाव के बाद अब आकाश आनंद की वापसी बहुत मुश्किल लग रही है। इस फैसले से आकाश के समर्थक काफी दुखी हैं और सोशल मीडिया पर उनकी वापसी की मांग कर रहे हैं।
आकाश आनंद को हटाने के बाद भी उन्हें पार्टी से बाहर करने पर सहमति नहीं बनी थी। लेकिन रविवार को सोशल मीडिया पर उनके समर्थन में ‘उम्मीदों का आकाश’ ट्रेंड होने लगा।
इससे पार्टी हाईकमान नाराज हो गया और उसी शाम बैठक कर ईशान आनंद को मुख्य सेक्टर प्रभारी बनाने का फैसला ले लिया गया।
मायावती ने यूपी और उत्तराखंड की जिम्मेदारी अपने पास ही रखी है। आकाश की बेदखली के पीछे उनके ससुर अशोक सिद्धार्थ को जिम्मेदार माना जा रहा है। अशोक के निष्कासन के बाद से ही आकाश पर भी गाज गिरने के कयास लगाए जाने लगे थे।
आकाश के भविष्य का बड़ा फैसला
बहुजन समाजवादी पार्टी के आकाश आनंद के राजीनीतिक और सियासी भविष्य को लेकर आगामी 10 सितंबर को कोई अहम बड़ा फैसला लिया जा सकता है। सूत्रों के मुताबिक बताया जा रहा है।
मायावती सितंबर को दिल्ली में पार्टी के बड़े पदाधिकारियों के साथ एक अहम बैठक करने जा रही हैं। इस बैठक में संगठन के बदलावों पर चर्चा होगी। इसमें आकाश को पार्टी से बाहर करने या उन्हें एक और मौका देने पर विचार हो सकता है।
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