संभल शाही जामा मस्जिद सर्वे केस पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई टली, अगले हफ्ते होगी सुनवाई
संभल की शाही जामा मस्जिद के सर्वे आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई को अगले मंगलवार, 21 जुलाई तक के लिए स्थगित कर दिया है
नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश के संभल स्थित शाही जामा मस्जिद सर्वे विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को अहम सुनवाई को एक सप्ताह के लिए स्थगित कर दिया है। मस्जिद प्रबंधन समिति ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें ट्रायल कोर्ट द्वारा एडवोकेट कमिश्नर की नियुक्ति और सर्वे प्रक्रिया को वैध ठहराया गया था।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान मस्जिद प्रबंधन समिति की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता हुजेफा अहमदी ने संक्षिप्त स्थगन (टालने) का अनुरोध किया, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया। अब इस बहुचर्चित मामले पर अगली सुनवाई 21 जुलाई को होगी।
प्रतिवादी पक्ष की ओर से अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन अदालत में उपस्थित थे। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं की है, यानी अदालत ने केवल सुनवाई की तारीख आगे बढ़ाई है और किसी भी पक्ष के दावे पर कोई अंतरिम निष्कर्ष नहीं निकाला है।
यह विवाद मुख्य रूप से संभल की शाही जामा मस्जिद की ऐतिहासिक जड़ों से जुड़ा हुआ है। हिंदू पक्ष का दावा है कि इस मस्जिद के स्थान पर पहले प्राचीन हरिहर मंदिर स्थित था, जिसे मुगल सम्राट बाबर ने साल 1529 में तोड़कर मस्जिद का निर्माण कराया था।
दूसरी तरफ, मुस्लिम पक्ष का कहना है कि यह मस्जिद लगभग 500 से 600 साल पुरानी है और इसे किसी मंदिर को तोड़कर नहीं बनाया गया था।
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विवाद की शुरुआत नवंबर 2024 में दायर एक दीवानी मुकदमे से हुई थी, जिसमें ट्रायल कोर्ट ने याचिका दायर होने के दिन ही स्थानीय निरीक्षण के लिए एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त कर सर्वे का आदेश दे दिया था।
इसके बाद मस्जिद परिसर का सर्वे कराया गया, जिसने व्यापक सार्वजनिक और कानूनी बहस को जन्म दिया। मस्जिद प्रबंधन समिति ने इस आदेश को चुनौती देते हुए तर्क दिया कि बिना पर्याप्त सुनवाई के ही आयोग नियुक्त कर दिया गया, जिसके बाद यह मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा।
दिलचस्प बात यह है कि संभल की जामा मस्जिद के साथ-साथ वाराणसी के ज्ञानवापी और मथुरा के कृष्ण जन्मभूमि विवादों को जल्द सुलझाने की उम्मीद के साथ सुप्रीम कोर्ट प्रशासन ने ‘समाधान समारोह 2026’ के तहत सहमति आधारित विवाद निपटारे की पहल की थी।
हालांकि, इन सभी मामलों के प्रमुख पक्षकारों ने इस मध्यस्थता के विकल्प को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। दोनों पक्षों का मानना है कि इन विवादों में महत्वपूर्ण कानूनी और संवैधानिक प्रश्न शामिल हैं, जिनका समाधान केवल अदालत के फैसले से ही संभव है।
अब जबकि सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई को 21 जुलाई तक के लिए टाल दिया है, संभल शाही जामा मस्जिद सर्वे विवाद फिलहाल अदालत के समक्ष विचाराधीन है। आगामी सुनवाई में एडवोकेट कमिश्नर की नियुक्ति, सर्वे आदेश की वैधता और इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले पर दोनों पक्षों के बीच विस्तृत बहस होने की उम्मीद है।
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