कांग्रेस में NCP (शरद) के विलय की चर्चा पर सुप्रिया सुले बोलीं- वक्त बताएगा
महाराष्ट्र के बारामती से लोकसभा की सदस्य सुप्रिया सुले ने ईवीएम पर स्टैंड बदलकर इंडिया अलायंस के सहयोगियों को चकित कर दिया है। इसके बाद कुछ घटनाक्रम ऐसे हुए हैं। जिन्होंने यह चर्चा मजबूत कर दी है कि सुप्रिया सुले नए साल में केंद्र में मंत्री बन सकती है।
महाराष्ट्र: राजनीतिक गलियारों में इस समय राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद चंद्र पवार) की लोकसभा सांसद सुप्रिया सुले को लेकर अटकलों का बाजार बेहद गर्म है।
हाल ही में ईवीएम (EVM) के मुद्दे पर कांग्रेस के रुख से अलग स्टैंड लेने और फिर दिल्ली में पार्टी सांसदों के साथ केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात के बाद सुप्रिया सुले अचानक चर्चा के केंद्र में आ गई हैं।
इस मुलाकात के बाद सुले ने सोशल मीडिया पर सार्वजनिक रूप से अमित शाह का दिल से धन्यवाद भी ज्ञापित किया था, जिसने उनके केंद्र सरकार में मंत्री बनने की अटकलों को और हवा दे दी है।
इसके साथ ही महाराष्ट्र में लंबे समय से एनसीपी के दोनों खेमों (शरद पवार और अजित पवार गुट) के एकजुट होने की सुगबुगाहट भी तेज हो गई है।
राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि सिर्फ सुप्रिया सुले और अजित पवार के बीच ही कड़वाहट कम नहीं हुई है, बल्कि रोहित पवार भी अजित पवार के नजदीक आए हैं।
हालिया दौर में पवार परिवार के बीच दूरियां घटती दिख रही हैं और अजित व शरद पवार के बीच निकटता बढ़ी है।
सुप्रिया सुले ने पिछले दिनों लोकसभा में चर्चा के दौरान यह कहकर सबको चौंका दिया था कि वह ईवीएम या वीवीपीएटी (VVPAT) पर सवाल नहीं उठाएंगी, क्योंकि वह खुद इन्हीं मशीनों के जरिए चार बार सांसद चुनी गई हैं।
विपक्षी गठबंधन के रुख से बिल्कुल विपरीत यह बयान राजनीतिक विश्लेषकों के लिए बेहद अप्रत्याशित था। विश्लेषकों का मानना है कि ईवीएम पर स्टैंड बदलना और फिर अमित शाह से मिलना सामान्य घटना नहीं है, बल्कि यह किसी बड़े नए सियासी घटनाक्रम की ओर इशारा करता है।
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यह पूरा घटनाक्रम साल 2026 में देश की राजनीति में एक बड़ा उलटफेर साबित हो सकता है। केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी के उत्तर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बनने की संभावनाओं के बीच मोदी 3.0 मंत्रिमंडल में बदलाव की अटकलें प्रबल हो गई हैं।
माना जा रहा है कि मकर संक्रांति के बाद और बंगाल व अन्य राज्यों के विधानसभा चुनावों से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कैबिनेट में फेरबदल की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।
यदि ये अटकलें सही साबित होती हैं और शरद पवार की अगुवाई वाली एनसीपी केंद्र की मोदी सरकार को समर्थन देती है, तो इसके दूरगामी परिणाम होंगे। शरद पवार के पास वर्तमान में 8 लोकसभा सांसद हैं।
इस संभावित गठबंधन से जहां एक तरफ केंद्र सरकार और मजबूत होगी, वहीं दूसरी तरफ महाराष्ट्र में दोनों गुटों के साथ आने से पवार परिवार की ताकत भी बढ़ेगी।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, शरद पवार के सामने महाराष्ट्र में अपनी पार्टी को एकजुट रखने और अपने क्षेत्रों का विकास सुनिश्चित करने की कड़ी चुनौती है। सत्ता के साथ रहने पर ही वे अपने मनमाफिक कार्य करवा पाएंगे।
सूत्रों का दावा है कि यदि सुप्रिया सुले मोदी सरकार में शामिल होती हैं, तो उन्हें कोई अहम मंत्रालय मिल सकता है और केंद्र में उनका रुतबा कुछ वैसा ही दिख सकता है, जैसा कभी यूपीए सरकार के दौरान शरद पवार का हुआ करता था।
इस तरह वे बारामती और शरद पवार की राजनीतिक विरासत को मजबूती से आगे बढ़ा पाएंगी।
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