अन्नामलाई के इस्तीफे से तमिलनाडु में खत्म हो गयी बीजेपी की आखिरी उम्मीद
नई दिल्ली। तमिलनाडु की राजनीति से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। भारतीय जनता पार्टी के फायरब्रांड नेता और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के. अन्नामलाई (K. Annamalai) ने बीजेपी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है।
बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने शुक्रवार को आधिकारिक तौर पर उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया है।
इस इस्तीफे के साथ ही तमिलनाडु में अपने दम पर पैर जमाने की कोशिश कर रही बीजेपी को अब तक का सबसे बड़ा झटका लगा है। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि क्या अन्नामलाई के जाने से दक्षिण भारत के इस बेहद महत्वपूर्ण राज्य में बीजेपी की ‘आखरी उम्मीद’ भी खत्म हो गई है?
अन्नामलाई ने 2 जून को ही अपना 5 पन्नों का इस्तीफा सौंप दिया था, जिसके बाद देश की राजधानी दिल्ली में भारी सियासी हलचल देखी गई। सूत्रों के मुताबिक, अन्नामलाई ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और संगठन महासचिव बी.एल. संतोष से मुलाकात की थी।
बीजेपी आलाकमान ने उन्हें मनाने और फैसले पर पुनर्विचार करने की आखिरी कोशिश की। यहां तक कि जब अन्नामलाई दिल्ली एयरपोर्ट के लिए निकल चुके थे, तब उन्हें दोबारा बातचीत के लिए वापस बुलाया गया। लेकिन पूर्व IPS अधिकारी अपने फैसले पर अडिग रहे।
क्यों अलग हुईं राहें? अन्नामलाई ने बयां किया दर्द
इस्तीफा स्वीकार होने के बाद अन्नामलाई ने सोशल मीडिया के जरिए अपने समर्थकों से सीधा संवाद किया। उन्होंने खुलकर माना कि पिछले 18 महीनों से पार्टी आलाकमान के साथ वैचारिक मतभेद चल रहे थे।
अन्नामलाई ने कहा: “मेरे सामने यह तय करना बहुत मुश्किल और बड़ा द्वंद्व था कि मैं एक बीजेपी कार्यकर्ता हूं या एक तमिलियन। मैंने कभी भी तमिल पहचान और तमिलनाडु के हितों से समझौता नहीं किया। राष्ट्रीय पार्टियां अक्सर वह भाषा नहीं बोल पातीं जो तमिलनाडु के लोग समझते हैं। मैंने पिछले 18 महीनों में आलाकमान के सामने कई बातें रखीं, लेकिन हमारी सोच आपस में मेल नहीं खा रही थी।”
अन्नामलाई ने यह भी खुलासा किया कि वह 4 दिसंबर 2025 को ही इस्तीफा देने वाले थे, लेकिन नेतृत्व के कहने पर वह चुनाव खत्म होने तक रुके रहे।
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तमिलनाडु में अन्नामलाई को “साउथ का सिंघम” कहा जाता था। 2020 में आईपीएस की नौकरी छोड़कर राजनीति में आए अन्नामलाई ने राज्य में बीजेपी को एक नई ऊर्जा दी थी। उनके जाने को बीजेपी के लिए ‘डेड एंड’ क्यों माना जा रहा है, इसे इन 3 पॉइंट्स से समझा जा सकता है।
1. वोट शेयर में रिकॉर्ड बढ़ोतरी का चेहरा खोया
अन्नामलाई के ही नेतृत्व में 2024 के लोकसभा चुनावों में बीजेपी ने तमिलनाडु में अपना अब तक का सबसे बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए 11.2% वोट शेयर हासिल किया था (जो 2019 में महज 3.6% था)। उनके आक्रामक प्रचार और ‘एन मन्न, एन मक्कल’ (मेरी धरती, मेरे लोग) पदयात्रा ने बीजेपी को गांव-गांव तक पहुंचाया था।
2. कोई दूसरा कद्दावर चेहरा मौजूद नहीं
वर्तमान में तमिलनाडु बीजेपी के अध्यक्ष नैनार नागेंद्रन हैं, लेकिन अन्नामलाई जैसी आक्रामक और युवाओं के बीच लोकप्रिय छवि वाला दूसरा कोई नेता फिलहाल पार्टी के पास दूर-दूर तक नहीं दिख रहा है। अन्नामलाई के इस्तीफे पर वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष नागेंद्रन ने भले ही कहा हो कि “बीजेपी दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी है, इससे कोई नुकसान नहीं होगा”, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है।
3. हालिया चुनावों में करारी शिकस्त
हाल ही में संपन्न हुए तमिलनाडु विधानसभा चुनावों में बीजेपी ने एआईएडीएमके (AIADMK) के साथ जूनियर पार्टनर के तौर पर चुनाव लड़ा था। इस चुनाव में पार्टी का वोट शेयर गिरकर 3% से भी कम रह गया। ऐसे में अन्नामलाई का जाना पार्टी की बची-कुची उम्मीदों पर पानी फेरने जैसा है।
बीजेपी छोड़ने के बाद अन्नामलाई ने साफ कर दिया है कि वे राजनीति से संन्यास नहीं ले रहे हैं, बल्कि एक नई शुरुआत कर रहे हैं। अन्नामलाई ने एक नए राजनीतिक आंदोलन की नींव रख दी है और युवाओं के लिए wetheleader.org नाम से एक मंच की शुरुआत की है।
उन्होंने घोषणा की है कि उनका नया राजनीतिक दल तमिलनाडु में 2031 का विधानसभा चुनाव पूरी ताकत के साथ लड़ेगा।
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