दलबदल पर भड़के तेजस्वी; बीजेपी में गए दो नए एमएलसी की सदस्यता रद्द करने की मांग
बिहार: विधान परिषद चुनाव के तुरंत बाद दल-बदल को लेकर सियासत गरमा गई है, जहाँ तेजस्वी यादव ने दो नए सदस्यों को हटाने की मांग की है। निर्दलीय चुनाव जीतने के हफ्ते भर के भीतर ही बंसीधर ब्रजवासी और राहुल राज ने बीजेपी का दामन थाम लिया और पार्टी दफ्तर के बाहर सदस्यता पर्ची के साथ तस्वीरें भी खिंचवाईं।
इसके कुछ ही घंटों बाद, शनिवार देर रात आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने एक कड़ा बयान जारी कर दोनों नवनिर्वाचित नेताओं को अयोग्य घोषित करने की पुरजोर मांग उठाई।
संवैधानिक नियमों के तहत अयोग्यता की मांग
उन्होंने कहा कि निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुने जाने के बाद इन दोनों सदस्यों का औपचारिक रूप से भाजपा में शामिल होना संविधान की दसवीं अनुसूची के पैरा 2(2) और अनुच्छेद 191(2) के तहत स्पष्ट रूप से अयोग्यता के प्रावधानों के दायरे में आता है, जिसके तहत विधान परिषद के सभापति को यह अधिकार है कि वे दल-बदल के आधार पर सदस्यता समाप्त करने का फैसला लें।
पूर्व उपमुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि भाजपा ने पहले भी विपक्ष के कई विधायकों के पाला बदलकर एनडीए में शामिल होने और साहिबगंज के विधायक राजू सिंह को अदालत द्वारा दोषी ठहराए जाने के बावजूद उनकी सदस्यता रद्द नहीं की, जबकि दूसरी ओर भाजपा ने इस स्थिति से बचाव करते हुए दावा किया है कि तिरहुत स्नातक और सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों से चुने गए ब्रजवासी और राज ने पार्टी में शामिल होने के बजाय केवल उसे अपना समर्थन दिया है।
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आरजेडी ने विधानसभा अध्यक्ष पर भेदभाव का आरोप लगाते हुए कहा कि दल बदलने वाले एनडीए विधायकों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने उदाहरण दिया कि दिल्ली की अदालत से सजा पाने के बावजूद साहेबगंज के बीजेपी विधायक राजू सिंह की सदस्यता अब तक बरकरार है।
इसी सियासी तनातनी के बीच विधान परिषद की आठ सीटों पर चुनाव हुए, जहाँ चार-चार सीटों पर लड़ने वाली बीजेपी को दो और जेडीयू को सिर्फ एक सीट पर जीत मिली।
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