चुनाव आयोग के खिलाफ सड़क पर ठाकरे बंधु: ‘विराट गर्जना मोर्चा’ में जुटे बड़े दिग्गज
नई दिल्ली: वोटर लिस्ट में बदलावों के विरोध में रविवार को मुंबई की सड़को पर उतरे राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे ने चुनाव आयोग के खिलाफ एक बड़ी मुहीम की शुरुआत की है। इस साझा नागरिको मार्च में किसी भी दल का झंडा इस्तेमाल नहीं किया गया बल्कि विपक्षी दलों के नेताओ और समर्थकों ने केवल तिरंगा हाथ में लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग की। विपक्षी खेमे का दावा है कि ‘विशेष गहन समीक्षा’ (SIR) के बहाने आम जनता के वोटिंग अधिकारों के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है, जिसे तुरंत रोका जाना चाहिए।
चुनाव आयोग की भूमिका पर ठाकरे भाइयों का तीखा प्रहार
शनिवार को शिवसेना (यूबीटी) और मनसे ने चुनाव आयोग पर वोटरों को धोखा देने और केंद्र की सत्ताधारी पार्टी की शाखा की तरह काम करने का तीखा आरोप लगाया, और हालांकि दोनों दल इस प्रदर्शन के लिए संगठनात्मक तैयारी कर रहे हैं, लेकिन नेताओं ने जोर दिया कि यह विरोध पार्टी की राजनीति से ऊपर है।
तथा इसे एक बड़े जन-आंदोलन के तौर पर पेश करते हुए आयोजकों ने सभी राजनीतिक दलों से बातचीत कर एक एकजुट विपक्षी मोर्चा बनाने की योजना की पुष्टि करते हुए कहा कि यह जनता की रैली है जो किसी एक पार्टी तक सीमित न रहकर पूरे राजनीतिक सिस्टम और नागरिकों की सामूहिक आवाज बनेगी।
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जिसके लिए वे सभी दलों से संपर्क करेंगे और देश के लोकतांत्रिक ढांचे तथा संस्थागत अखंडता की रक्षा के लिए नागरिकों से मुंबई की सड़कों पर बड़ी संख्या में उतरने की अपील करते हुए एसआईआर प्रक्रिया के तहत संस्थागत पक्षपात और वोटर लिस्ट में हेरफेर के खिलाफ मेट्रो सिनेमा से शुरू होने वाले इस कड़ा विरोध मार्च में शामिल होने का आह्वान किया है।
राज ठाकरे ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और सत्तापक्ष पर सरकारी तंत्र के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए वोटर लिस्ट संशोधन प्रक्रिया (SIR) को फौरन रोकने की मांग की है। उन्होंने इसे संविधान और लोकतंत्र की रक्षा का सवाल बताते हुए आम जनता से इस मुहिम में बढ़-चढ़कर जुड़ने की अपील की।
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