सितंबर के तीसरे हफ्ते में संसद का विशेष सत्र बुला सकती है सरकार, परिसीमन सहित कई अहम बिलों पर चल रही तैयारी
नई दिल्ली: केंद्र की नरेंद्र मोदी महिला आरक्षण बिल को पारित कराने के लिए सितंबर के तीसरे हप्ते में संसद का एक छोटा विशेष सत्र बुलाने पर विचार कर रही है। हालांकि, इस महत्वपूर्ण बिल को पास कराने के लिए सरकार को सदन में दो तिहाई बहुमत साबित करने की बड़ी परीक्षा से गुजरना होगा। सूत्रों के अनुसार इस सत्र से पहले विपक्षी दलों की राय जानने के लिए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के सुझाव पर, एक सर्वदलीय बैठक भी बुलाई जा सकती है।
मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा
कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे द्वारा संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू को पत्र लिखकर विशेष सत्र से पहले सर्वदलीय बैठक बुलाने का आग्रह करने के बाद, सरकार सितंबर के तीसरे हफ्ते में 3 से 4 दिन का संसद का विशेष सत्र बुलाने पर विचार कर रही है, जिसका मुख्य एजेंडा परिसीमन से जुड़े महिला कोटा के दो लंबित विधेयकों को पारित कराना होगा।
हालांकि मानसून सत्र के बाद सदनों को अनिश्चित काल के लिए स्थगित किया गया था लेकिन उसका औपचारिक समापन न होने के कारण सरकार के पास शीतकालीन सत्र का इंतजार किए बिना इसी सत्र को दोबारा बुलाने का विकल्प है, और रणनीतिकार संविधान संशोधन के लिए आवश्यक दो-तिहाई बहुमत व संख्याबल का आकलन करने में जुटे हैं, क्योंकि नए सहयोगियों व दल बदलने वालों के समर्थन से एनडीए (NDA) की ताकत बढ़ी है और अंतिम निर्णय इसी बहुमत को लेकर सरकार के आश्वस्त होने पर निर्भर करेगा।
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संसद के विशेष सत्र बुलाने का फैसला राजनीतिक नफा-नुकसान और सीटों के गणित (संख्याबल) पर निर्भर करता है। यदि सरकार को सदन में बहुमत का पूरा भरोसा होगा तो वह सितंबर में सत्र बुलाने की तैयारी तेज कर सकती है। इसके विपरीत यदि राजनीतिक समीकरण पक्ष में नहीं दिखे, तो सरकार मानसून सत्र को आदिकारिक रूप से खत्म करके इस विशेष बैठक को आगे के लिए टालने का फैसला भी ले सकती है।
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