कर्नाटक हाई कोर्ट ने 52 आपराधिक मामले वापस लेने के सरकारी आदेश पर रोक लगाई
कर्नाटक हाईकोर्ट ने तय कानूनी प्रक्रियाओं का पालन न होने के कारण राज्य सरकार द्वारा आलंद दंगे सहित 52 आपराधिक मामलों को वापस लेने के फैसले पर अंतरिम रोक लगा दी है
नई दिल्ली: कर्नाटक हाईकोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा 52 आपराधिक मामलों को वापस लेने के फैसले पर अंतरिम रोक लगा दी है, जिसमें वर्ष 2022 के आलंद सांप्रदायिक दंगे से जुड़े सात मुकदमे भी शामिल हैं।
कोर्ट ने ’52 आपराधिक बनाम कर्नाटक सरकार’ मामले की सुनवाई के दौरान पहली नजर में माना कि सरकार ने दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 321 के तहत तय कानूनी नियमों का सही तरीके से पालन नहीं किया है।
अदालत के इस आदेश के बाद राज्य में कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक टकराव बेहद तेज हो गया है।
यह पूरा विवाद पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के कार्यकाल में हुई कैबिनेट बैठक के उस फैसले से जुड़ा है, जिसमें किसानों, कन्नड़ समर्थक कार्यकर्ताओं, कावेरी और कलासा बंदूरी आंदोलनों के प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मुकदमों को वापस लेने की मंजूरी दी गई थी।
इसे भी पढ़ें: गहराई से: सरकारी रिकॉर्ड में मर चुके सलीम वास्तिक तक कैसे पहुंची दिल्ली पुलिस
इनमें कन्नड़ कार्यकर्ता वाटल नागराज के खिलाफ दर्ज 10 मामले भी शामिल थे। हालांकि, सबसे ज्यादा विवाद कलबुर्गी जिले के आलंद तालुक में मार्च 2022 को लाडले मुश्ताक दरगाह परिसर में शिवलिंग विवाद के बाद भड़के सांप्रदायिक दंगे के सात मामलों को वापस लेने पर हुआ, जिसमें कई पुलिसकर्मी घायल हुए थे।
इस फैसले पर कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और गृह मंत्री जी. परमेश्वर ने सरकार का बचाव करते हुए कहा था कि यह कदम राजनीतिक रूप से प्रेरित मुकदमों को खत्म करने के लिए उठाया गया था और कैबिनेट की उपसमिति ने कानूनी राय के बाद ही इसकी सिफारिश की थी।
दूसरी तरफ, भाजपा ने कांग्रेस पर तुष्टिकरण और वोट बैंक की राजनीति का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार किसानों की आड़ में दंगे के आरोपियों को बचाने का प्रयास कर रही है।
फिलहाल हाईकोर्ट की रोक के बाद सरकार का यह फैसला अगली सुनवाई तक प्रभावी नहीं रहेगा।
Discover more from
Subscribe to get the latest posts sent to your email.
