“हमारे सामने था ही नहीं नया फॉर्म”, चुनाव आयोग के दावों के बीच शीर्ष अदालत ने दूर किया भ्रम

“हमारे सामने था ही नहीं नया फॉर्म”, चुनाव आयोग के दावों के बीच शीर्ष अदालत ने दूर किया भ्रम

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने साफ़ किया है कि उसने नए वोटरों के रजिस्ट्रेशन के लिए चुनाव आयोग के बदले हुए ‘फॉर्म 6’ पर कोई फैसला नहीं सुनाया है और न ही उसे मंज़ूरी दी है। अदालत का कहना है कि जब वह बिहार में वोटर लिस्ट के ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ से जुड़े मामले पर सुनवाई कर रही थी, तब यह नया संशोधित फॉर्म उसके सामने पेश ही नहीं किया गया था।

इसलिए, इस नए फॉर्म को अदलात द्वारा हरी झंडी दिए जाने की बाते पूरी तरह निराधार है और कोर्ट ने इस बदलाव पर अपनी कोई क़ानूनी सहमति नहीं दी है।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कामकाज तथा फॉर्म-6 में किए गए बदलावों को लेकर दायर नई याचिका पर सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट ने नए फॉर्म-6 पर कोई न्यायिक फैसला नहीं दिया है।

अदालत की मीडिया को नसीहत

क्योंकि बिहार एसआईआर मामले में फैसला सुनाए जाने के समय यह संशोधित फॉर्म अस्तित्व में ही नहीं था, और मीडिया रिपोर्टिंग पर सावधानी बरतने की सलाह देते हुए कहा कि अदालत की पिछली मौखिक टिप्पणियों को संशोधित घोषणा-पत्र की मंजूरी या अस्वीकृति के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

यह पूरा विवाद तब और गहरा गया जब चुनाव आयोग ने 26 सितंबर की अपनी प्रेस विज्ञप्ति में संकेत दिया था कि मई 2026 के फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने इस संशोधित घोषणा-पत्र को बरकरार रखा है, जबकि यह फॉर्म फैसले के बाद लागू किया गया था और अदालत को इसके प्रावधानों की जांच करने का अवसर ही नहीं मिला था।

नए फॉर्म-6 के तहत नए मतदाता के रूप में पंजीकरण कराने वाले आवेदकों के लिए यह बताना अनिवार्य कर दिया गया है कि वे या उनके माता-पिता पिछले एसआईआर में शामिल थे या नहीं, जो अन्य राज्यों के पुराने प्रारूप में नहीं था, और इस बदलाव को लेकर चुनाव आयोग के भीतर भी इस बात पर सवाल उठे हैं कि क्या केंद्र सरकार द्वारा मतदाता पंजीकरण नियम, 1960 में संशोधन किए बिना ऐसा बदलाव किया जा सकता है, क्योंकि रिपोर्ट्स के अनुसार आयोग के दो चुनाव आयुक्तों ने भी इस पर आपत्ति जताई थी।

चुनावी फॉर्म में हुए बदलावों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष में तकरार बाद गई है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि भाजपा को फायदा पहुंचाने के लिए फॉर्म में एकतरफा और अवैध तरीके से फेरबदल किया गया है। वहीं, भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने इन आरोपों को खारिज करते हुए साफ किया कि सुप्रीम कोर्ट ने इस फॉर्म को न तो अवैध घोषित किया है और न ही इसे अमान्य ठहराया है, इसलिए विपक्ष के दावे पूरी तरह बेबुनियाद हैं।


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Sanjana Kumari

संजना कुमारी: रियल-टाइम खबरों पर मजबूत पकड़ रखने वाली डिजिटल कंटेंट क्रिएटर और पत्रकार, जो सामाजिक-राजनीतिक, क्षेत्रीय और सांस्कृतिक घटनाक्रमों को डिजिटल दर्शकों के लिए सटीक व आकर्षक बनाती हैं