सड़क पर नाकेबंदी के बाद क़ानूनी मोर्चा; चुनाव आयोग के खिलाफ कोर्ट पहुंची राहुल गांधी की टीम
नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विपक्ष के मार्च को दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा घेरा बढ़ाकर मंडी हाउस पर ही रोक दिया है। बाराखंबा रोड से सुप्रीम कोर्ट की ओर बढ़ रहे ‘इंडिया’ गठबंधन के इस प्रदर्शन के चलते प्रशासन ने अदलात जाने वाले रास्तो की पूरी नाकाबंदी कर दी।
इस बीच, राहुल गांधी की वकीलों की टीम ने शाम साढ़े चार बजे की तय समय सीमा के बाद भी व्यक्तिगत रूप से याचिका दाखिल करने की विशेष अनुमति ली। अनुमति मिलते ही ‘राहुल गांधी बनाम चुनाव आयोग’ नाम से यह औपचारिक याचिका सुप्रीम कोर्ट में दर्ज करा दी गई, जिसमे चुनावी प्रक्रियाओं में दखल की मांग की गई है।
मंडी हाउस पर पैदल मार्च और नारेबाज़ी
मंडी हाउस के पास INDIA ब्लॉक के नेताओं—जिनमें मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी, अखिलेश यादव, प्रियंका गांधी वाड्रा, ममता बनर्जी और नेहा बोरा आदि शामिल थे—द्वारा सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च करते समय बसों को रोके जाने के बाद पैदल मार्च निकाल कर चुनाव आयोग के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की गई, जहां राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस मार्च को शिवजी की बारात बताते हुए व्यंग्य किया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार भी इसे देख रहे हैं।
जबकि इससे पहले विपक्षी सांसदों ने सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत को पत्र लिखकर समय मांगा था और सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि याचिका दायर करने के लिए कोई भी नागरिक आ सकता है लेकिन कोर्ट प्रदर्शन की जगह नहीं है।
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वहीं मार्च के दौरान भूपिंदर सिंह हुड्डा और सचिन पायलट ने CEC ज्ञानेश कुमार के कदमों को अवैध व असंवैधानिक बताते हुए उनके इस्तीफे की मांग की और शांतिपूर्ण तरीके से गांधीवादी रूप में विरोध जताने पर पुलिस द्वारा लाठियां बरसाए जाने व नेताओं को जेल में डालने की कड़ी आलोचना की।
उन्होंने साफ़ किया कि यह जन-आंदोलन सुप्रीम कोर्ट की तरफ बढ़ रहा है। जिसका एक ही मकसद है कि चुनावी गड़बड़ियों के जिम्मेदार अधिकारी को उनके पद से हटाया जाए और उन पर क़ानूनी मुकदमा चलाकर जेल भेजा जाए। भदौरिया ने चेतावनी देते हुए कहा कि जब तक मुख्य चुनाव आयुक्त अपने पद से इस्तीफा नहीं दे देते और उनके खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई नहीं होती, तब तक विपक्ष का यह जमीनी संघर्ष और शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन थमेगा नहीं।
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