ओरछा में नाम बदलने की सियासत: जहांगीर महल पर नया दांव
नई दिल्ली: मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने ओरछा के मशहूर जहांगीर महल का नाम बदलकर वीर सिंह महल करने का बड़ा इशारा किया है। ओरछा दौरे पर आए मुख्यमंत्री ने तर्क दिया की चुकी इस ऐतिहासिक इमारत को बुंदेला राजा वीर सिंह देव ने बनवाया था इसलिए इसका नाम भी उन्ही के नाम पर रखने की जरुरत है उनके इस बयान के बाद से इलाके में गुलामी के प्रतीकों को हटाने और बुंदेला इतिहास के असली नायको को सम्मान देने की चर्चा एक बार फिर गरमा गई है।
जिससे इस ऐतिहासिक ईमारत को लेकर पर नई बहस सुरु हो गई है। वह ओरछा में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की एक बड़ी बैठक में शामिल होने आए थे। इस दौरान उन्होंने प्रसिद्ध रामराजा सरकार मंदिर में पूजा अर्चना की ओर वहां बन रहे रामराज लोक के कामों को भी देखा। इसके बाद मीडिया से बात करते हुए उन्होंने साफ कहा की गुलामी के प्रतीकों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और जहांगीर महल का नाम बदला जाना चाहिए।
नरोत्तम मिश्रा ने भी इस बयान का समर्थन करते हुए कहा
ओरछा में बेतवा नदी के किनारे स्थित प्रसिद्ध जहांगीर महल का नाम बदलकर अब ‘वीर सिंह महल’ किया जा सकता है। मुख्यमंत्री ने एक सवाल के जवाब में इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि इस महल का निर्माण राजा वीर सिंह ने करवाया था, इसलिए इतिहास के ऐसे पहलुओं को सामने लाने और अतीत की गलतियों को सुधारने की जरूरत है।
पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने भी इस बयान का समर्थन करते हुए कहा कि ऐतिहासिक विरासत के साथ अतीत में हुई छेड़छाड़ को ठीक किया जाना चाहिए और महल का नाम उसे बनवाने वाले के नाम पर ही होना चाहिए।
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इतिहासकारों के अनुसार, राजा वीर सिंह ने 1518 में अपने मित्र जहांगीर (सलीम) के लिए इस महल का निर्माण कराया था, हालांकि जहांगीर कभी यहां रहने नहीं आए। बुंदेला और मुगल वास्तुकला के अनोखे मेल वाले इस महल के नाम बदलने की चर्चा ने एक बार फिर ऐतिहासिक तथ्यों को सुर्खियों में ला दिया है।
इस महल की मुख्य पहचान इसकी ऊँची छत पर बने बड़े गुंबद और चारो कोनो पर मौजूद गोल गुबंद है जिसके भीतर करीब 236 कमरे बने है। इसे बनाने वाले राजा वीर सिंह बुंदेला, ओरछा के शासक राजा मधुकर शाह के चौथे बेटे थे। इतिहास के जानकर बताते है की वीर सिंह मुगल सम्राट अकबर की नीतियों के खिलाफ थे लेकिन अकबर के बेटे शाहजादे सलीम से उनकी बहुत पक्की दोस्ती थी सुर दोनों की यही धनिष्ठता आगे चलकर इस भव्य महल के बनाने का मुख्य कारण बनी।
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