ममता बनर्जी से तृणमूल कांग्रेस छीनने की तैयारी, भूपेन्द्र यादव के घर बागी सांसदों की बैठक
बागी गुट के पास अब लोकसभा में दलबदल विरोधी कानून (Anti-Defection Law) से बचने के लिए जरूरी दो-तिहाई से ज्यादा सांसदों का समर्थन हासिल हो चुका है, जिससे वे संसद में खुद को ‘असली टीएमसी’ के रूप में मान्यता दिलाने की तैयारी में हैं
नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में करारी हार झेलने के बाद ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (TMC) का संकट अब अपने चरम पर पहुंच गया है। पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी के हाथ से राजनीतिक जमीन खिसकने के साथ-साथ अब उनकी पार्टी पर नियंत्रण भी खतरे में पड़ता दिखाई दे रहा है।
राजधानी दिल्ली में केंद्रीय पर्यावरण मंत्री और भाजपा के पश्चिम बंगाल चुनाव प्रभारी भूपेन्द्र यादव के सरकारी आवास पर टीएमसी के बागी सांसदों की एक बेहद गोपनीय और निर्णायक बैठक हुई है।
इस बैठक के बाद यह दावा किया जा रहा है कि बागी गुट के पास अब लोकसभा में दलबदल विरोधी कानून (Anti-Defection Law) से बचने के लिए जरूरी दो-तिहाई से ज्यादा सांसदों का समर्थन हासिल हो चुका है, जिससे वे संसद में खुद को ‘असली टीएमसी’ के रूप में मान्यता दिलाने की तैयारी में हैं।
सुदीप बंदोपाध्याय और शताब्दी रॉय भी पहुंचे, बागी खेमे में संख्या हुई 20
दिल्ली के राजनैतिक गलियारों से आ रही खबरों के मुताबिक, इस बगावत का नेतृत्व कर रहीं चार बार की सांसद डॉ. काकोली घोष दस्तिदार और शताब्दी रॉय के साथ अब ममता बनर्जी के सबसे भरोसेमंद सहयोगियों में से एक, लोकसभा सांसद सुदीप बंदोपाध्याय भी भाजपा नेता भूपेन्द्र यादव के घर पहुंचे हैं। सुदीप बंदोपाध्याय की इस मौजूदगी ने ममता खेमे को सबसे बड़ा झटका दिया है।
बागी गुट के सूत्रों का दावा है कि लोकसभा में टीएमसी के कुल 28 सांसदों में से 20 सांसद अब इस विद्रोही खेमे के साथ आ चुके हैं। बागी गुट सुदीप बंदोपाध्याय को लोकसभा में अपना नया नेता घोषित करने की योजना बना रहा है। इस बैठक में पश्चिम बंगाल के नए मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी और हाल ही में राज्यसभा से इस्तीफा देने वाले सुखेन्दु शेखर रॉय भी मौजूद थे।
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सायानी घोष और माला रॉय के पाला बदलने से ममता खेमा हैरान
ममता बनर्जी के लिए सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह रही कि जिन सांसदों को उन्होंने हाल ही में पार्टी संकट को थामने के लिए महिला और युवा विंग की कमान सौंपी थी, वे भी बागी खेमे की बैठक में नजर आए। कोलकाता दक्षिण से सांसद माला रॉय और जादवपुर से सांसद सायानी घोष, जो ममता बनर्जी के दक्षिण कोलकाता के पारंपरिक गढ़ का प्रतिनिधित्व करती हैं, दिल्ली में भूपेन्द्र यादव के आवास पर नजर आईं।
इसके अलावा प्रिसून बनर्जी (हावड़ा), अरूप चक्रवर्ती (बांकुड़ा) और काकोली घोष दस्तिदार जैसे कद्दावर चेहरे भी इस ‘ऑपरेशन लोटस’ के अगले चरण का हिस्सा बनते दिख रहे हैं। विद्रोही खेमे के निलंबित नेता रिजू दत्ता ने दावा किया है कि यह संख्या सोमवार तक 22 तक पहुंच सकती है और यह पूरा गुट केंद्र की भाजपा नीत एनडीए (NDA) सरकार को अपना समर्थन सौंपेगा।
सोमवार को स्पीकर ओम बिरला से मिलेंगे बागी, टीएमसी ने बताया अवैध
बागी सांसदों का यह गुट सोमवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर संसद के भीतर एक अलग ब्लॉक (गुट) के रूप में मान्यता देने के लिए औपचारिक पत्र सौंपने जा रहा है। चूंकि टीएमसी के 28 में से 20 सांसद इस पत्र पर हस्ताक्षर कर चुके हैं, जो कि दो-तिहाई (19 सांसद) के कानूनी आंकड़े से अधिक है, इसलिए इन सांसदों की सदस्यता पर दलबदल कानून के तहत आंच आने की संभावना बेहद कम है।
दूसरी तरफ, ममता बनर्जी के साथ खड़े वरिष्ठ सांसद सौगत रॉय, कल्याण बनर्जी और महुआ मोइत्रा ने भाजपा पर जांच एजेंसियों का डर दिखाकर ‘पोचिंग’ (सांसदों की खरीद-फरोख्त) करने का आरोप लगाया है।
राज्यसभा सांसद सागरिका घोष ने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि कानून के मुताबिक बिना किसी दूसरी पार्टी में औपचारिक विलय (Merger) के संसद के भीतर किसी अलग गुट को मान्यता नहीं दी जा सकती।
वहीं महुआ मोइत्रा ने बहरामपुर के सांसद यूसुफ पठान पर भी अमित शाह के आमंत्रण पर दिल्ली आने का आरोप लगाते हुए निशाना साधा। पश्चिम बंगाल विधानसभा में पहले ही 80 में से 60 विधायकों द्वारा ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में अलग गुट बना लेने के बाद, लोकसभा में हुई इस ऐतिहासिक बगावत ने ममता बनर्जी के पांच दशक लंबे राजनैतिक करियर के सामने अब तक का सबसे बड़ा अस्तित्व का संकट खड़ा कर दिया है।
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