कर्नाटक कैबिनेट विस्तार के बाद कांग्रेस में घमासान, नाराज दो विधायकों ने छोड़ी पार्टी

कर्नाटक कैबिनेट विस्तार के बाद कांग्रेस में घमासान, नाराज दो विधायकों ने छोड़ी पार्टी

कर्नाटक में मंत्रिमंडल विस्तार के बाद उपजी नाराजगी और बगावत के चलते कई विधायकों के इस्तीफे के ऐलान से कांग्रेस सरकार के सामने बड़ा राजनीतिक संकट खड़ा हो गया है

कर्नाटक: कांग्रेस सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार के तुरंत बाद पार्टी के भीतर चल रही कलह खुलकर सतह पर आ गई है।

मंत्री पद की आस लगाए बैठे कई विधायकों की उपेक्षा किए जाने से नाराज नेताओं ने बगावत का झंडा उठा लिया है, जिसके चलते दो विधायकों ने विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा देने की घोषणा कर दी है, जबकि कई वरिष्ठ नेताओं और उनके समर्थकों ने आलाकमान के खिलाफ खुला मोर्चा खोल दिया है।

विवाद की शुरुआत तब हुई जब मंत्रिमंडल विस्तार के दौरान मंत्रियों की सूची में अंतिम समय में फेरबदल किए गए।

पहली सूची में भटकल के विधायक मनकल वैद्य का नाम शामिल था, लेकिन आखिरी मिनट में उन्हें हटाकर दावणगेरे के विधायक एस.एस. मल्लिकार्जुन को जगह दे दी गई, वहीं एमएलसी गायत्री शांतेगौड़ा का नाम काटकर एक पद खाली छोड़ दिया गया।

हालांकि इस अनदेखी पर पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन सूत्रों का मानना है कि यह सब पार्टी दिग्गजों के भारी दबाव के कारण हुआ है।

इस आंतरिक असंतोष का सबसे बड़ा झटका तब लगा जब तीन बार के विधायक यशवंतरायगौड़ा पाटिल ने डिप्टी स्पीकर को अपना इस्तीफा सौंपते हुए कांग्रेस परिवार से अपने सभी रिश्ते खत्म करने का ऐलान कर दिया।

उन्होंने तर्क दिया कि इंडी राज्य की एकमात्र ऐसी सीट है, जहां से आज तक किसी को मंत्री पद नहीं मिला है।

इसके साथ ही सागर से विधायक बेलूर गोपालकृष्ण ने भी इस्तीफे का ऐलान करते हुए तीखा सवाल उठाया कि क्या मंत्री पद केवल पूर्व मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों के बच्चों के लिए ही आरक्षित हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें मंत्री बनाने का वादा किया गया था, लेकिन रातों-रात सूची बदल दी गई।

भद्रावती के विधायक संगमेश ने भी उपेक्षा से नाराज होकर इस्तीफे की धमकी दी है, जबकि पूर्व मंत्री दिनेश गुंडूराव ने सोशल मीडिया पर कड़ी नाराजगी जताई है।

वहीं दूसरी ओर, विजयनगर और गोविंदराजनगर के विधायकों के समर्थकों ने सड़कों पर उतरकर बसों की आवाजाही रोक दी और जमकर नारेबाजी की।

इस भारी राजनीतिक संकट के बीच मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने सभी नाराज नेताओं और कार्यकर्ताओं से संयम और धैर्य बनाए रखने की अपील की है।

उन्होंने सफाई दी कि पार्टी में कई योग्य विधायक मौजूद हैं, लेकिन सीमित पदों के कारण हर किसी को एक साथ मंत्री बनाना संभव नहीं है।

उन्होंने अपना उदाहरण देते हुए कहा कि उन्हें भी साल 2004 में और बाद में सिद्धारमैया सरकार (2013-18) के शुरुआती दौर में कैबिनेट में जगह नहीं मिली थी, लेकिन उन्होंने धैर्य रखा जिसका परिणाम आज उनके सामने है।

बहरहाल, कर्नाटक कांग्रेस में उठा यह सियासी तूफान आने वाले दिनों में सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।


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Mehak B