कल पश्चिम बंगाल विधानसभा में पेश होगा UCC विधेयक
पश्चिम बंगाल विधानसभा के बजट सत्र में सोमवार को समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक पेश होने जा रहा है, जिससे वह उत्तराखंड, गुजरात और असम के बाद इसे अपनाने वाला देश का अगला राज्य बन सकता है
पश्चिम बंगाल: राजनीति में एक बड़ा मोड़ आने वाला है, जहां शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार सोमवार को विधानसभा के बजट सत्र में यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) यानी समान नागरिक संहिता विधेयक पेश करने जा रही है।
विधानसभा चुनाव 2026 के संकल्प पत्र में भाजपा ने सरकार बनने के छह महीने के भीतर इसे लागू करने का वादा किया था, जिसे अब समय से पहले ही सदन के पटल पर रखा जा रहा है।
इस विधेयक के अलावा सरकार विधानसभा में असामाजिक गतिविधियों पर रोक लगाने और सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़ा एक और सख्त विधेयक भी पेश कर सकती है।
इसे भी पढ़ें: बीके हरिप्रसाद बने कर्नाटक कांग्रेस के नए अध्यक्ष, सीएम बने डीके शिवकुमार
यदि यह यूसीसी विधेयक सदन से पारित हो जाता है, तो उत्तराखंड, गुजरात और असम के बाद पश्चिम बंगाल समान नागरिक संहिता अपनाने वाला देश का अगला राज्य बन जाएगा।
प्रस्तावित यूसीसी विधेयक के मसौदे में सभी नागरिकों के लिए विवाह, तलाक, संपत्ति के उत्तराधिकार और भरण-पोषण जैसे मामलों में एक समान कानून लागू करने का प्रावधान है।
इसके तहत बहुविवाह (पॉलीगमी) और एकतरफा तीन तलाक जैसी प्रथाओं पर पूरी तरह रोक लगाने, विवाह के 60 दिनों के भीतर उसका पंजीकरण अनिवार्य करने और लिव-इन रिलेशनशिप का जिला मजिस्ट्रेट के पास पंजीकरण अनिवार्य करने जैसे नियम शामिल हो सकते हैं, जबकि अनुसूचित जनजातियों (एसटी) को इसके दायरे से बाहर रखे जाने की संभावना है।
इस विधेयक को लेकर राज्य में राजनीतिक घमासान भी तेज हो गया है, जहां पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और कांग्रेस ने इस विधेयक को धर्मनिरपेक्षता के खिलाफ बताते हुए इसका पुरजोर विरोध करने का ऐलान किया है, वहीं भाजपा इसे महिलाओं को समान अधिकार देने और तुष्टिकरण की राजनीति को खत्म करने की दिशा में एक बड़ा संवैधानिक कदम बता रही है।
Discover more from
Subscribe to get the latest posts sent to your email.
