जेल के कैदी नंबर 626710 पर बनी फिल्म को यूनिवर्सिटी ने रोका, छात्रों में बढ़ी हलचल

जेल के कैदी नंबर 626710 पर बनी फिल्म को यूनिवर्सिटी ने रोका, छात्रों में बढ़ी हलचल

नई दिल्ली: बेंगलुरु की नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया युनिवर्सिटी (NLSIU) में जेल में बंद उमर खालिद पर बनी एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म की स्क्रीनिंग को रोक दिया गया है। ‘लॉ एंड सोसाइटी कमेटी’ की तरफ से 14 सितंबर को इस फिल्म को कॉलेज में दिखाने और उस के बाद इस मुद्दे पर बातचीत करने की पूरी तैयारी थी, लेकिन आखिरी समय पर इसे टालना पड़ा।

इस डॉक्यूमेंटी की ललित वचानी ने उमर खालिद की जेल की जिंदगी पर बनाया है, जिसका नाम ‘प्रिजनर नंबर 626710 इज प्रेजेंट’ है। यूनिवर्सिटी में इस फिल्म को लेकर होने वाले कार्यक्रम के अचानक टलने से कैंपस के छात्रों के बीच काफी चर्चाएं शुरू हो गई है।

आयोजकों की ओर से छात्रों को ई-मेल भेजकर यह जानकारी दी गई कि ‘लॉजिस्टिकल और सुरक्षा कारणों’ के चलते इस इवेंट को टाला जा रहा है, हालांकि यह भी स्पष्ट किया गया कि इसी ट्राइमेस्टर में यह आयोजन फिर से किया जाएगा।

LawSoc ने जोर देकर कहा कि वे किसी के दबाव में आकर पीछे नहीं हटे हैं, बल्कि यह फैसला स्क्रीनिंग को सुरक्षित और जिम्मेदार तरीके से सुनिश्चित करने के लिए लिया गया है।

कमेटी के मुताबिक, इस आयोजन का उद्देश्य प्री-ट्रायल डिटेंशन, जमानत, असहमति और लोकतांत्रिक आजादी जैसे व्यापक कानूनी सवालों पर चर्चा को बढ़ावा देना था। सितंबर में उमर खालिद की कैद के छह साल पूरे होने के अवसर पर इसे राजनीतिक कैदी दिवस के मौके पर दिखाया जाना था।

ABVP ने किया कड़ा विरोध

इस प्रस्तावित स्क्रीनिंग का अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने कड़ा विरोध किया था। एबीवीपी ने यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर को पत्र लिखकर मांग की थी कि शैक्षणिक परिसरों का इस्तेमाल राजनीतिक या वैचारिक प्रचार के लिए न होने दिया जाए ताकि कैंपस का माहौल राजनीतिक ध्रुवीकरण से बचा रहे।

गौरतलब है कि हाल ही में यह यूनिवर्सिटी CJI सूर्य कांत और बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा को दीक्षांत समारोह में बुलाए जाने के विरोध को लेकर भी सुर्खियों में रही थी। यूनिवर्सिटी के छात्रों और पूर्व छात्रों के विरोध के चलते 12 सितंबर को होने वाला 34वां दीक्षांत समारोह टाल दिया गया था, जो अब 17 अक्टूबर को होगा।

इस विवाद से पहले हैदराबाद की नल्सार (NALSAR) यूनिवर्सिटी में भी छात्रों ने चीफ जस्टिस सूर्य कांत के आने का विरोध किया था। छात्रों के इस कदम पर नाराज होकर बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के चेयरमैन ने विरोध करने वाले छात्रों के एनरोलमेंट पर रोक लगाने की धमकी दे दी थी।

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर BCI को कड़ी फटकार लगाई, जिसके बाद BCI को अपना यह फैसला वापस लेना पड़ा। इस पूरे विवाद के दौरान बेंगलुरु की NLSIU यूनिवर्सिटी के सैकड़ो मौजूदा और पूर्व छात्रों ने एकजुटता दिखाई थी। उन्होंने नल्सार के छात्रों के हक में एक खुला समर्थन पत्र जारी करके साफ किया था कि वे छात्रों के विरोध करने के अधिकार के साथ खड़े है।


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Mehak B