उन्नाव रेप केस: पूर्व बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को सुप्रीमकोर्ट से बड़ा झटका
नई दिल्ली। उन्नाव दुष्कर्म मामले के दोषी और पूर्व भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। शीर्ष अदालत ने शुक्रवार (15 मई 2026) को दिल्ली हाई कोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें सेंगर की उम्रकैद की सजा को निलंबित कर उसे जमानत दी गई थी।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ ने सीबीआई की अपील पर यह फैसला सुनाया। सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय के बाद अब कुलदीप सिंह सेंगर को जेल में ही रहना होगा।
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट के उस तर्क पर कड़ी आपत्ति जताई जिसमें कहा गया था कि एक विधायक ‘लोक सेवक’ (पब्लिक सर्वेंट) की श्रेणी में नहीं आता। कोर्ट ने इसे ‘अत्यधिक तकनीकी दृष्टिकोण’ करार देते हुए कहा कि पॉक्सो (POCSO) कानून बच्चों की सुरक्षा के लिए बनाया गया है और इसमें किसी प्रभावशाली पद पर बैठे व्यक्ति द्वारा किए गए अपराध को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। अदालत ने स्पष्ट किया कि विधायक जैसे पद पर आसीन व्यक्ति समाज में एक प्रभावशाली और प्रभुत्व वाली स्थिति में होता है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
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पीठ ने हाई कोर्ट को निर्देश दिया है कि वह सेंगर द्वारा अपनी दोषसिद्धि के खिलाफ दायर मुख्य अपील पर अगले दो महीने के भीतर नए सिरे से सुनवाई पूरी करे। अदालत ने यह भी कहा कि यदि मुख्य अपील पर समय सीमा के भीतर फैसला नहीं हो पाता है, तो हाई कोर्ट को गर्मियों की छुट्टियों से पहले सजा निलंबन की अर्जी पर दोबारा विचार करना चाहिए। सुनवाई के दौरान सीबीआई की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी थी कि नाबालिग से दुष्कर्म जैसे जघन्य मामले में केवल लंबे समय तक जेल में रहना जमानत का आधार नहीं हो सकता।
यह मामला 2017 का है जब उन्नाव में एक नाबालिग लड़की के साथ दुष्कर्म की घटना हुई थी। दिसंबर 2019 में ट्रायल कोर्ट ने सेंगर को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। पिछले साल दिसंबर 2025 में दिल्ली हाई कोर्ट ने उसकी सजा को निलंबित करते हुए रिहाई का आदेश दिया था, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने तुरंत अंतरिम रोक लगा दी थी और अब उस आदेश को पूरी तरह निरस्त कर दिया है। सेंगर फिलहाल पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत से जुड़े एक अन्य मामले में भी 10 साल की सजा काट रहा है।
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