वोटर लिस्ट पर घमासान: पूर्व CEC ओ.पी. रावत और जयराम रमेश ने उठाए गंभीर सवाल
नई दिल्ली: मतदाता सूची को लेकर चल रही देशव्यापी बहस के बीच पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ओ.पी. रावत और कांग्रेस नेता जयराम रमेश के बयानों ने इस मुद्दे को और गरमा दिया है।
पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ओ.पी. रावत ने विशेष गहन पुनरीक्षण SIR की प्रक्रिया और चुनाव आयोग के भीतर दो चुनाव आयुक्तों की असहमति को एक बेहद गंभीर मामला बताया है।
इसी बीच कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट शेयर कर चुनावी प्रक्रिया की ईमानदारी वोटर लिस्ट से नामों को हटाए जाने और आयोग के काम करने के तरीके पर बड़े सवाल खड़े किए हैं।
उनके इस तीखे हमले ने मतदाता अधिकारों तकनीक के इस्तेमाल और पारदर्शिता को लेकर चल रहे विवाद को देश में एक बार फिर से तेज कर दिया है।
चुनाव आयोग में आंतरिक असहमति पर चिंता
विशेष गहन पुनरीक्षण यानी Special Intensive Revision SIR को लेकर निर्वाचन आयोग और विपक्ष के बीच चल रही खींचतान अब और तीखी हो गई है। पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ओ.पी. रावत ने हालिया घटनाक्रम पर चिंता जताते हुए कहा है कि आयोग के भीतर इस तरह की असहमति बेहद गंभीर और दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति को दर्शाती है।
रावत ने विशेष तौर पर Form 6 में किए गए बदलावों पर सवाल उठाते हुए उन्हें नियमों के लिहाज से गलत बताया।Rawat के मुताबिक निर्वाचन आयोग एक बहुसदस्यीय संस्था है और बड़े फैसलों में सामूहिक निर्णय प्रक्रिया महत्वपूर्ण है।
यह टिप्पणी ऐसे समय आई जब The Indian Express की एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि दो निर्वाचन आयुक्तों ने पिछले 10 महीनों में कई फैसलों पर औपचारिक आपत्तियां दर्ज की थीं। रिपोर्ट के अनुसार ये आपत्तियां SIR मतदाता नाम जोड़ने हटाने Form 6 और चुनावी डेटाबेस से जुड़े मुद्दों पर थीं।
सामूहिक निर्णय जरूरी, आयोग में मतभेद गंभीर
पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ओ.पी. रावत के अनुसार चुनाव आयोग एक बहुसदस्यीय संस्था है, जहां बड़े फैसलों में सबकी सहमति और सामूहिक निर्णय बहुत जरूरी है।
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उनकी यह टिप्पणी द इंडियन एक्सप्रेस की उस रिपोर्ट के बाद आई है जिसमें दावा किया गया कि दो चुनाव आयुक्तों ने पिछले 10 महीनों में विशेष गहन पुनरीक्षण SIR फॉर्म 6 और मतदाता सूची से नाम हटाने जैसे कई महत्वपूर्ण फैसलों पर लिखित रूप से अपनी आपत्तियां दर्ज कराई थीं।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने ‘X’ पर चुनाव आयोग पर निशाना साधते हुए दावा किया कि एसआईआर (SIR) के तीन चरणों में लगभग 14 करोड़ नाम हटाए गए हैं।
उन्होंने डिजिटल सिस्टम ‘ECINet’ और एआई AI के इस्तेमाल पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि इससे स्थानीय अधिकारियों के अधिकार प्रभावित हुए हैं और फॉर्म 6 में पारदर्शिता होनी चाहिए।
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि एसआईआर SIR से जुड़े सभी निर्णय तीनों आयुक्तों की सर्वसम्मति से ही लिए गए थे।
आयोग प्रभावित वोटरों के घर-घर जाकर दस्तावेज जुटाने और नाम जोड़ने की सुविधा दे रहा है साथ ही ‘ECINet’ की कार्यप्रणाली की जांच के लिए एक विशेष समिति भी गठित की गई है ।
फिलहाल ओ.पी. रावत की टिप्पणियों और जयराम रमेश के ‘X’ पोस्ट ने मतदाता सूची की शुद्धता और चुनाव आयोग की निर्णय प्रक्रिया पर एक बड़ी राष्ट्रीय बहस छेड़ दी है।
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