UP का नया चुनावी चक्रव्यूह: लोकसभा की बढ़त बनाम विधानसभा की जंग, जाने अंदर का समीकरण
नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश की राजनीती में 2024 के लोकसभा नतीजों के बाद दोनों बड़े गुट अपनी-अपनी कमियों को सुधारने में जुट गए है। बीजेपी की अगुवाई वाला एनडीए पिछला चुनाव भूलकर वोटरों का भरोसा फिर से जितने की कोशिश कर रहा है।
दूसरी तरफ, पिछली जीत से जोश में आया इंडिया गठबंधन इसी माहौल को अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में भी बनाए रखना चाहता है। हालांकि पिछले आंकड़ों को देखकर यह कहना जल्दबाजी होगी कि विधानसभा चुनाव में जनता किसे पूरी ताकत सौपेंगी, भले ही विपक्ष की उम्मीद आसमान पर हो।
उत्तर प्रदेश में 2024 के लोकसभा चुनावों के नतीजों का विधानसभा सेगमेंट के हिसाब से विश्लेषण करने पर सपा 184, कांग्रेस 39 और एनडीए 174 सीटों पर आगे थी जिससे किसी को पूर्ण बहुमत न मिलने के कारण भाजपा के सामने 2017 या 2022 जैसे नतीजे लाकर पिछले नुकसान की भरपाई करने की चुनौती है।
हालांकि सपा-कांग्रेस गठबंधन 43 सीटें जीतकर सबसे आगे रहने के बावजूद वोट प्रतिशत में एनडीए से मामूली पीछे रहा, जो हार-जीत में अहम भूमिका निभाता है, जबकि 2004, 2009, 2012, 2014 और 2019 के चुनावी आंकड़ों और रुझानों से स्पष्ट है कि लोकसभा और विधानसभा चुनावों के नतीजे अलग-अलग रहे हैं।
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राहुल-प्रियंका का कड़ा रुख: ‘ग्रेडिंग सिस्टम’ से नपेंगे निष्क्रिय अध्यक्ष
वहीं दूसरी ओर उत्तर प्रदेश में कांग्रेस संगठन को सक्रिय और मजबूत बनाए रखने के लिए आलाकमान ने राहुल और प्रियंका द्वारा सचिवों के साक्षात्कार (अब तक 39 साक्षात्कार) लेने, ‘संगठन सृजन अभियान’ के तहत जिला, मंडल और ब्लॉक अध्यक्षों को ए, बी तथा सी श्रेणियों में बांटने और प्रतिभा खोज के नए नेताओं की सूची तैयार कर निष्क्रिय जिला अध्यक्षों का स्थान लेने के वास्ते एक सख्त ग्रेडिंग सिस्टम लागू किया है जिसके तहत सी कैटेगरी वाले निष्क्रिय अध्यक्षों को नोटिस देकर हटाया जाएगा।
उत्तर प्रदेश में जल्द ही कांग्रेस जिला अध्यक्षों की एक नई सूची जारी होने वाली है, जिसके तहत कमजोर प्रदर्शन करने वाले नेताओ की जगह ‘प्रतिभा खोज’ अभियान से निकाले युवा और ऊर्जावान चेहरों को कमान सौंपी जाएगी।
पार्टी ने 2027 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए जमीन पर सक्रीय रहने वाले दूसरे स्तर के नेताओ की एक नई टीम तैयार कर ली है। इसके साथ ही संगठन के कामकाज को रफ़्तार देने के लिए अब एआईसीसी सचिवों को हर महीने कम से कम 15 से 20 दिन अपने प्रभार वाले जिलों में रहकर सीधे निगरानी करने का सख्त निर्देश दिया गया है।
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