हाईकोर्ट के दखल के बाद तिजारा में देर रात हुआ मतदान, कांग्रेस प्रत्याशी सैनी जीते
नई दिल्ली: राजस्थान के तिजारा नगर परिषद् के चेयरमैन चुनाव में सोमवार को दिनभर चले भारी सियासी ड्रामे के बाद आखिरकार कांग्रेस के उम्मीदवार रामावतार सैनी ने 18 वोट हासिल कर जीत दर्ज की। मतदान केंद्र तक पार्षदों के समय पर न पहुंच पाने के कारण पैदा हुए विवाद के बाद राजस्थान हाईकोर्ट को इस मामले में हस्तक्षेप करना पड़ा।
अदालत के आदेश पर वोटिंग का समय पहले रात 8 बजे और फिर बढ़ाकर रात 10 बजे तक किया गया। देर रात 10 बजे के बाद हुई वोटो की गिनती में कांग्रेस प्रत्याशी को विजेता घोसित किया गया, जिससे इस हाई-वोल्टेज राजनीतिक खींचतान का अंत हुआ।
तिजारा म्युनिसिपल काउंसिल के चेयरमैन पद के चुनाव में हाई-वोल्टेज ड्रामे और कांग्रेस समर्थित पार्षदों को रोके जाने के आरोपों के बीच, रिटर्निंग ऑफिसर और एसडीएम दिव्या ने रामावतार सैनी को चुनाव का सर्टिफिकेट सौंप दिया है, क्योंकि 35 पार्षदों वाले इस निकाय में बहुमत के लिए 18 वोटों की जरूरत थी।
राजस्थान हाईकोर्ट का दखल और बढ़ी समय-सीमा
यह विवाद तब राजस्थान हाईकोर्ट तक पहुंच गया था जब कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि हिमाचल प्रदेश से लौट रहे उनके पार्षदों को पंचकूला के पास रोक लिया गया है, जिसके बाद जस्टिस अनूप कुमार ढांड की सिंगल बेंच ने भिवाड़ी के एडीएम को स्टेट इलेक्शन कमीशन को रिपोर्ट देने का निर्देश दिया और सभी पार्षदों के समय पर न पहुंच पाने की वजह से वोटिंग की समय-सीमा रात 10 बजे तक बढ़ा दी गई थी।
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इस चुनाव प्रक्रिया से पहले पूर्व विधायक संदीप यादव और अन्य कांग्रेस नेताओं ने रिटर्निंग ऑफिसर के आवास पर पहुंचकर हिरासत में लिए गए पार्षदों को सुरक्षित लाए जाने तक चुनाव टालने की मांग करते हुए एसएचओ के पास शिकायत भी दर्ज कराई थी।
कांग्रेस नेताओं लगाया की उनके कुछ पार्षदों ने वीडियो मैसेज भेजकर अज्ञात जगह पर बंधक बनाए जाने और अपनी जान को खतरा होने की चिंता जताई थी। इस घटना के विरोध में कांग्रेस कार्यकर्ताओ ने थाने के घेराव के साथ जोरदार प्रदर्शन किया। इसके आलावा, पार्टी नेताओ ने दावा किया कि पूर्व विधायक संदीप यादव को भी गुरुग्राम के पास फर्रुखनगर में पुलिस ने कई घंटों तक अवैध हिरासत में रखा था, ताकि वे चुनाव प्रक्रिया में शामिल न हो सकें।
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