क्या प्रदर्शन में चली पैलेट गन: जानिए पुलिस का दावा और डॉक्टर की रिपोर्ट
जंतर-मंतर पर ‘संसद चलो’ मार्च के दौरान पैलेट गन से घायल होने के प्रदर्शनकारियों के दावों को दिल्ली पुलिस और पीआईबी ने पूरी तरह खारिज करते हुए झूठा बताया है
नई दिल्ली: जंतर-मंतर पर 20 जुलाई को ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के ‘संसद चलो’ मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन (Pellet Gun) चलाए जाने का एक गंभीर विवाद सामने आया है।
आंदोलन में शामिल कई युवाओं ने आरोप लगाया कि पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) की कार्रवाई के दौरान वे पैलेट गन के छर्रों से घायल हुए हैं।
सफदरजंग और लेडी हार्डिंग अस्पताल में भर्ती पीड़ितों और उनके मेडिकल रिकॉर्ड्स के हवाले से दावा किया गया है कि कई छात्रों की पीठ, चेहरे, गर्दन और आंखों में छर्रे लगे हैं, जिनमें से एक 19 वर्षीय छात्र की आंख की रोशनी जाने का भी खतरा बना हुआ है।
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मामले की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय ने पुलिस को 20 जुलाई की पूरी घटना की वीडियो रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखने के निर्देश दिए हैं।
दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस और पीआईबी (PIB) फैक्ट चेक ने इन सभी दावों को सिरे से खारिज करते हुए झूठा और भ्रामक बताया है। दिल्ली पुलिस का कहना है कि उनके पास पैलेट गन का कोई स्टॉक नहीं है और न ही वे भीड़ नियंत्रण के लिए इसका इस्तेमाल करते हैं।
उल्लेखनीय है कि पैलेट गन (पंप-एक्शन गन) से एक साथ धातु के दर्जनों छोटे छर्रे निकलते हैं, जिसका इस्तेमाल आमतौर पर कश्मीर, हरियाणा के किसान आंदोलन या मणिपुर जैसे तनावग्रस्त इलाकों में अंतिम उपाय के तौर पर किए जाने के आरोप लगते रहे हैं।
यदि प्रदर्शनकारियों के ये दावे सच साबित होते हैं, तो देश की राजधानी में आम नागरिकों पर पैलेट गन के इस्तेमाल का यह पहला मामला होगा।
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