तरल पदार्थों से ही क्यों तुड़वाया जाता है अनशन? जानें इसकी वैज्ञानिक वजह
नीट पेपर लीक मामले पर 22 दिनों से अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक आज अपना अनशन तोड़ सकते हैं, जिसे सुस्त पाचन तंत्र को सुरक्षित रूप से सक्रिय करने के लिए हमेशा नारियल पानी या हल्के तरल पदार्थों से ही तुड़वाया जाता है
नई दिल्ली: नीट पेपर लीक मामले को लेकर सफदरजंग अस्पताल में भर्ती सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल का आज 22वां दिन है। उन्होंने सरकार के सामने तीन शर्तें रखी हैं और कहा है कि इनमें से एक भी शर्त पूरी होने पर वह आज ही अपना अनशन समाप्त कर देंगे।
गौरतलब है कि बीते शनिवार को दिल्ली पुलिस ने उन्हें जंतर-मंतर से उठाकर अस्पताल में भर्ती कराया था।
लंबे अनशन के बाद अक्सर यह सवाल उठता है कि किसी व्यक्ति का उपवास हमेशा नारियल पानी, ताजे फलों के जूस या शहद के घोल से ही क्यों तुड़वाया जाता है, सीधे रोटी-चावल जैसा ठोस खाना क्यों नहीं दिया जाता? दरअसल, कई दिनों तक अन्न-जल न लेने से शरीर का पाचन तंत्र सुस्त और शांत अवस्था में चला जाता है।
ऐसे में अचानक भारी ठोस खाना खाने से आंतों पर अत्यधिक दबाव पड़ता है, जिससे पेट में मरोड़, उल्टी, पाचन संबंधी गंभीर समस्याएं और ‘रिफीडिंग सिंड्रोम’ जैसी स्थिति का खतरा बन जाता है।
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इसके अतिरिक्त, लंबे उपवास के दौरान शरीर में ग्लूकोज का स्तर काफी गिर जाता है और पानी तथा खनिजों की भारी कमी हो जाती है। नारियल पानी या हल्के जूस में मौजूद प्राकृतिक शर्करा बिना पाचन तंत्र को थकाए सीधे खून में मिलकर सेकंडों में शरीर को तुरंत ऊर्जा प्रदान करती है।
नारियल पानी में पोटेशियम, सोडियम और मैग्नीशियम जैसे इलेक्ट्रोलाइट्स प्रचुर मात्रा में होते हैं, जो एक प्राकृतिक सलाइन की तरह काम करके शरीर में खनिजों के स्तर को तुरंत संतुलित करते हैं। इससे मांसपेशियों में ऐंठन और दिल की धड़कन अनियमित होने जैसी समस्याओं से बचाव होता है।
चिकित्सकीय दृष्टि से लंबे उपवास को खत्म करने की यह प्रक्रिया बेहद संवेदनशील होती है। शुरुआत के 24 से 48 घंटों तक केवल हल्का जूस, नारियल पानी या सूप देकर आंतों को दोबारा सक्रिय किया जाता है।
जब पेट तरल पदार्थों को पचाने लगता है, तब धीरे-धीरे दलिया, खिचड़ी और अंत में सामान्य ठोस आहार देने की शुरुआत की जाती है ताकि शरीर पर कोई बुरा असर न पड़े।
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