दिग्विजय की MP से UP तक की बड़ी तैयारी: ‘सनातन स्वाभिमान’ के लिए 20 अक्टूबर से पैदल यात्रा
नई दिल्ली: मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह आगामी 20 अक्टूबर को दशहरा के पावन मौके पर सनातन स्वाभिमान यात्रा शुरू करने जा रहे है धार्मिक नगरी उज्जैन से लेकर अयोध्या तक जाने वाले इस सफर को उन्होंने पूरी तरह गैर-राजनीतिक बताया है।
दिग्विजय सिंह का कहना है की यह यात्रा किसी दल के विरोध या समर्थन में नहीं बल्कि मंदिरो के चंदे और चढ़ावे में हो रही चोरी के खिलाफ पारदर्शिता लाने के लिए है। उन्होंने आम जनता से अपील की है जो लोग भी आस्था के नाम पर हो रही इस कथित लूट के खिलाफ है वे शिवधाम से रामधाम तक के इस सफर में उनका साथ दे।
राम मंदिर ट्रस्ट और चंदे के दुरुपयोग पर गंभीर आरोप
पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने बयान दिया है कि सत्य-श्रद्धा की रक्षा और सामाजिक सद्भाव के लिए निकाली जा रही इस यात्रा से जुड़ने के इच्छुक लोगों के लिए एक गूगल फॉर्म भी जारी किया गया है और प्रभु श्री राम करोड़ों सनातनियों की आस्था व स्वाभिमान के प्रतीक हैं, जिन्हें याद करते हुए उन्होंने बताया कि 1988-89 में विश्व हिंदू परिषद द्वारा शुरू किए गए राम शिला पूजन अभियान में वैचारिक मतभेदों के बावजूद उन्होंने हिस्सा लिया था तथा अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान दिया था।
लेकिन इसके बाद विश्व हिंदू परिषद, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा से जुड़े लोगों पर चंदे व चढ़ावे के धन का दुरुपयोग करने का गंभीर आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े धन से निजी संपत्तियां और वाहन खरीदे जाने जैसे करोड़ों रुपये के घपले के प्रकरण सामने आए हैं जिन्हें किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
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दिग्विजय सिंह ने सीधा आरोप लगाया है की राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े कुछ लोग श्रद्धालुओं के चढ़ावे को लूट रहे है और पूरी सरकार चंपत राय का बचाव करने में जुटी है। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी आस्था और भक्ति के साथ हो रही इस खुली लूट को अब और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
इसी वजह से अधर्म पर धर्म की जीत के प्रतीक विजयादशमी के दिन उन्होंने उज्जैन से अयोध्या तक सनातन स्वाभिमान यात्रा निकालने का फैसला किया है जिसका मूल मंत्र यतो धर्मस्ततो जयः होगा। उन्होंने एक बार फिर साफ़ किया की इस यात्रा का मकसद किसी नेता या राजनीतिक दल का विरोध करना नहीं बल्कि धर्म के नाम पर हो रही कथित हेराफेरी के खिलाफ आम जनता को जागरूक करना है।
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