महंगाई का झटका: पेट्रोल-डीजल की कीमतों में 10 दिनों में चौथी बार बढ़ोतरी
नई दिल्ली: पेट्रोल और डीजल की कीमतों में फिर बढ़ोतरी कर आम आदमी को महंगाई का एक और बड़ा झटका लगा है, क्योंकि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में पिछले 10 दिनों में चौथी बार बढ़ोतरी की गई है। इस ताज़ा वृद्धि में पेट्रोल की कीमत में 2.61 रुपये प्रति लीटर, जबकि डीजल के दाम में 2.71 रुपये प्रति लीटर का इज़ाफ़ा हुआ है।
कीमतों में इस उछाल के बाद देश की राजधानी दिल्ली में पेट्रोल की कीमत बढ़कर 102.12 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत 95.20 रुपये प्रति लीटर के स्तर पर पहुंच गई है।
पश्चिम एशिया संकट के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों को देखते हुए सार्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम कंपनियां ईंधन के खुदरा दाम बढ़ा रही हैं।
विशेषज्ञों और अधिकारियों के अनुसार, पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में यह वृद्धि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की ऊंची कीमतों, रिफाइनिंग मार्जिन में कमी और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये के कमजोर होने के कारण हुई है।
इससे पहले, 23 मई को भी पेट्रोल की कीमत में 87 पैसे प्रति लीटर और डीजल के दाम में 91 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई थी। इसी दिन वाहन ईंधन के तौर पर इस्तेमाल होने वाले सीएनजी की कीमत में भी एक रुपये प्रति किलोग्राम की वृद्धि हुई थी, और हाल के दिनों में तीन बार हुई इस बढ़ोतरी के बाद सीएनजी के दाम कुल चार रुपये प्रति किलोग्राम तक बढ़ चुके हैं।
वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आई इस भारी तेज़ी के पीछे एक बड़ा भू-राजनीतिक संकट है। अमेरिका और इजराइल की तरफ से 28 फरवरी को ईरान पर किए गए हमले के बाद दोनों पक्षों में छिड़े संघर्ष से वैश्विक तेल की आवाजाही के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग, होर्मुज जलडमरूमध्य अवरुद्ध हो गया है। इस रुकावट के कारण कच्चे तेल की वैश्विक कीमतें 50 प्रतिशत से अधिक बढ़ गई हैं।
इसे भी पढ़ें: संजय राउत का भाजपा पर प्रहार: बंगाल में वोट काटे तो जनता ने ममता दीदी के पक्ष में किया रिकॉर्ड मतदान
हालांकि, खुदरा ईंधन विक्रेताओं ने इस बढ़ती लागत के बावजूद काफी समय तक पेट्रोल पंपों पर कीमतें कम रखी थीं, जिसे सरकार ने उपभोक्ताओं को महंगाई से बचाने के उद्देश्य से उठाया गया एक बड़ा कदम बताया था।
दूसरी ओर, इस पूरे घटनाक्रम पर राजनीतिक घमासान भी शुरू हो गया है। विपक्षी दलों ने सरकार पर आरोप लगाया है कि वह अंतरराष्ट्रीय बाजार की प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद जानबूझकर पश्चिम बंगाल समेत पांच राज्यों में विधानसभा चुनावों के संपन्न होने का इंतजार कर रही थी और चुनाव खत्म होते ही कीमतें बढ़ा दी गईं।
इस बीच, सरकार का कहना है कि खुदरा कीमतों में इस वृद्धि के बावजूद, खुदरा ईंधन विक्रेताओं को अभी भी भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने इस सप्ताह की शुरुआत में स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा था कि 15 मई को की गई वृद्धि से तेल कंपनियों के नुकसान में केवल एक चौथाई की कमी आई है, और सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियां अब भी प्रतिदिन लगभग 750 करोड़ रुपये का भारी नुकसान उठा रही हैं।
बहरहाल, इस ताज़ा बढ़ोतरी के बाद देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतें अब मई, 2022 के बाद से अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं। इससे पहले, मार्च 2024 में लोकसभा चुनाव से ठीक पहले पेट्रोल और डीजल की कीमतों में दो रुपये प्रति लीटर की कटौती की गई थी, जबकि आखिरी बार कीमतों में बड़ी वृद्धि अप्रैल 2022 में देखी गई थी।
Discover more from
Subscribe to get the latest posts sent to your email.
