चंपत राय को ‘क्लीनचिट’ दिलाने की लिखी जा रही स्क्रिप्ट? मीडिया और अखबारों में समर्थन में नैरेटिव बनाने की कोशिश तेज
नई दिल्ली(राजा ज़ैद)। अयोध्या के राम मंदिर में हुए बहुचर्चित चढ़ावा और चंदा चोरी मामले ने अब एक नया राजनीतिक और सामाजिक मोड़ ले लिया है।
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय को लेकर उत्तर प्रदेश पुलिस की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे मीडिया गलियारों में एक खास तरह की ‘स्क्रिप्ट’ पर चर्चा तेज हो गई है।
सूत्रों और राजनीतिक विश्लेषकों का दावा है कि चंपत राय को इस पूरे घोटाले से बेदाग यानी ‘क्लीनचिट’ दिलाने की पृष्ठभूमि तैयार की जा रही है और इसके लिए प्रमुख टीवी चैनलों तथा अखबारों में उनके समर्थन में खबरें और नैरेटिव आना शुरू हो गए हैं।
एसआईटी (SIT) की एफआईआर से चंपत राय का नाम गायब
हाल ही में एसआईटी की शुरुआती रिपोर्ट के बाद इस मामले में आठ लोगों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज की गई और उन्हें गिरफ्तार भी किया गया। गिरफ्तार होने वालों में चंपत राय के बेहद करीबी रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव का नाम भी शामिल है। हालांकि, सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि इस एफआईआर में न तो चंपत राय का नाम है और न ही ट्रस्ट के एक अन्य महत्वपूर्ण सदस्य अनिल मिश्रा का।
इसी बात को लेकर विपक्षी दलों और अयोध्या के ही कुछ स्थानीय संतों ने सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। आरोप है कि जांच का रुख इस तरह मोड़ा जा रहा है जिससे केवल निचले स्तर के कर्मचारियों या सहयोगियों को बलि का बकरा बनाया जा सके और शीर्ष अधिकारियों को बचा लिया जाए।
चैनलों और अखबारों में अचानक बदला हवा का रुख
विपक्षी नेताओं और स्वतंत्र पत्रकारों का कहना है कि पिछले कुछ दिनों से देश के कई बड़े न्यूज चैनलों और राष्ट्रीय अखबारों में चंपत राय के पक्ष में खबरें दिखाई जाने लगी हैं।
ईमानदारी और समर्पण का नैरेटिव:
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खबरों में लगातार चंपत राय के दशकों पुराने आरएसएस (RSS) और विश्व हिंदू परिषद (VHP) के बैकग्राउंड को हाइलाइट किया जा रहा है। उन्हें एक ‘अनुशासित और समर्पित’ प्रचारक के रूप में पेश किया जा रहा है, जिन्होंने अपना पूरा जीवन राम मंदिर आंदोलन को दे दिया।
मीडिया रिपोर्ट्स में अब इस घोटाले को ‘चोरी या भ्रष्टाचार’ के बजाय ‘निगरानी की कमी’ और ‘एसओपी (SOP) को ठीक से लागू न कर पाना’ बताया जा रहा है। यानी जानबूझकर किए गए घोटाले को सिर्फ एक प्रशासनिक चूक साबित करने की कोशिश हो रही है।
कुछ मीडिया आउटलेट्स में यह भी दिखाया जा रहा है कि चंपत राय खुद इस चोरी के खिलाफ थे और उन्होंने ही सबसे पहले पुलिस को सतर्क किया था, जबकि हाल ही में सामने आए 5 जून के एक कथित सीसीटीवी फुटेज ने इस दावे पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
विपक्ष और अयोध्या के संतों ने खड़े किए गंभीर सवाल
आम आदमी पार्टी (AAP) के सांसद संजय सिंह समेत कई विपक्षी नेताओं ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। संजय सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जांच की अपील पर प्रतिक्रिया देते हुए आरोप लगाया कि सरकार जांच पूरी होने से पहले ही चंपत राय को क्लीनचिट देने की कोशिश में जुटी है। उन्होंने भूमि खरीद में हुए कथित पुराने घोटालों के दस्तावेज भी दोबारा सामने रखे।
वहीं, राम मंदिर आंदोलन के पुराने सिपाही जैसे विनय कटियार, संतोष दुबे और महंत कमल नयन दास जैसे चेहरों ने भी ट्रस्ट की कार्यप्रणाली और चंपत राय के एकाधिकार पर सवाल उठाए हैं। अयोध्या के स्थानीय संतों का कहना है कि इतने बड़े स्तर पर हो रही चंदा चोरी की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए चंपत राय को तुरंत अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए।
क्या होगा चंपत राय का भविष्य?
फिलहाल स्थिति यह है कि अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, चंपत राय पर नैतिक आधार पर इस्तीफा देने का भारी दबाव है, ताकि राम मंदिर और ट्रस्ट की छवि को और नुकसान न पहुंचे। लेकिन दूसरी तरफ, मीडिया के एक बड़े हिस्से द्वारा उनके पक्ष में माहौल बनाकर उन्हें कानूनी तौर पर पूरी तरह पाक-साफ दिखाने की जो पटकथा लिखी जा रही है, उसने इस पूरी जांच की विश्वसनीयता पर ही सवालिया निशान लगा दिया है। अब देखना यह होगा कि एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट में चंपत राय को वाकई क्लीनचिट मिलती है या फिर उन्हें इस लापरवाही का खामियाजा भुगतना पड़ेगा।
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