36 दिन में हासिल की सरकार के इरादों पर फतह

36 दिन में हासिल की सरकार के इरादों पर फतह

36 दिनों के ऐतिहासिक युवा आंदोलन और भरी राजनितिक दबाव के चलते केंदीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा, जिसके बाद सर्कार ने परीक्षा प्रणाली में कड़े सुधर और मुआवजे जैसे बड़े फैसले लिए है

 

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट की युवाओं के संदर्भ में ‘कॉकरोच’ वाली आलोचना से उपजे विवाद के बाद बनी ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) ने मात्र 36 दिनों के आंदोलन के भीतर ही शिक्षा विभाग से जुड़े पूरे तंत्र की ‘सफाई’ कर दी है।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद कॉकरोच जनता पार्टी ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि यह तो अभी केवल एक ट्रेलर है, पूरी पिक्चर आनी बाकी है और अब देश का युवा पूरी तरह जाग चुका है।

जंतर-मंतर से विरोध प्रदर्शन वापस लेने के बाद ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (सीजेपी) के प्रवक्ता सौरव दास बोले हैं कि लोकतंत्र में जवाबदेही सबसे जरूरी है, देश के युवा हमारा भविष्य हैं और वे इसे बहाल करने में पूरी तरह सफल रहे हैं।

उन्होंने इसे एक बड़ी जीत बताते हुए कहा कि युवाओं ने इस ऐतिहासिक आंदोलन को अब आधिकारिक तौर पर वापस ले लिया है

दास ने सरकार पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि राजनीती बंद करें, जिससे आप मुस्लिम-विरोधी, ईसाई-विरोधी मुद्दे पर आधारित है ।

कृपया छात्रों सहित समाज के प्रत्येक समुदाय के कल्याण के लिए काम करें, क्योकि जनता का भरोसा तभी हासिल होगा। उन्होंने ये भी कहा की युवा इस राष्ट्र की सभी समस्याओं का समाधान करेगा

यह पहला मौका है जब शीर्ष राजनीतिक नेतृत्व ने gen-z नेताओं के साथ औपचारिक चर्चा करके मांगों पर बिंदुवार फैसले लिए। सरकार ने पेपर लीक में जान गंवाने वाले बच्चों के परिवारों को एक करोड़ रुपये मुआवजा देने पर सैद्धांतिक सहमति जताई है।

आंदोलन ख़त्म होने पर अभिजीत दीपके के माता पिता ने बेहद ख़ुशी जताई। दीपके की माँ ने कहा की वे बेटे को घर बुलाकर कसकर गले लगाएंगी। जेन-जी ने मात्र 36 दिनों में बिना किसी राजनीतिक अनुभव या जमीं आधार पर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की विदाई करा दी और मंत्रालय के तंत्र में बड़े पैमाने पर बदलाव ला दिया है।

एक नए डिजिटल प्लेटफार्म और अभिलिखित न होने के बावजूद CJP ने परीक्षा प्रणाली की खामियों जैसे मुद्दो पर बड़ा आंदोलन खड़ा कर राष्टीय मुद्दा तय कर दिया है। इस आंदोलन में समाज के सभी गृहिणियों, डॉक्टरो, वकीलो और माता पिता ने एक साथ आकर बच्चो के सुनेहरे भविष्य के लिए प्रदर्शन किया।

इसके दबाव में सरकार ने पेपर लीक के दोषियों के लिए फास्ट ट्रैक अदालतें बनाने और सार्वजनिक परीक्षा अधिनियम, 2024 में संशोधन कर 10 करोड़ तक जुर्माना व 10 साल की सजा का प्रावधान करने वाला विधेयक लाने का निर्णय लिया है।

अप्रैल 2011 में अन्ना हजारे द्वारा देश से भ्रष्टाचार खत्म करने के लिए शुरू किए गए अनशन और लोकपाल कानून की मांग को लेकर लाखों लोग सड़कों पर उतरे थे, जिसके भारी दबाव में आखिरकार संसद को मजबूत भ्रष्टाचार विरोधी कानून पारित करना पड़ा।

शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का गृह मंत्री रहते दिया वह पुराना बयान वायरल हो रहा है जिसमें उन्होंने कहा था कि एनडीए सरकार में इस्तीफे नहीं होते।

हालांकि, मोदी सरकार के 12 वर्षों के कार्यकाल में चार ऐसे बड़े मौके आए हैं जब सरकार को झुकना पड़ा है। इस दौरान एमजे अकबर के बाद धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा देने वाले दूसरे मंत्री बने हैं, जबकि इसके अलावा सरकार को 2015 में भूमि अधिग्रहण संशोधन विधेयक और 2021 में तीनों कृषि कानूनों को भी वापस लेना पड़ा था।

शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मौजूदा तीसरे कार्यकाल में सर्कार किआ झुकने का पहला बड़ा मामला है। हालाँकि इस कार्यकाल किआ दौरान एप्सटीन फाइल विवाद में केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पूरी पर भी विपक्ष ने तीखा हमला बोलै था लेकिन सरकर ने इस मामले पर कोई आधिकारिक संज्ञान नहीं लिया।


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Sanjana Kumari

संजना कुमारी: रियल-टाइम खबरों पर मजबूत पकड़ रखने वाली डिजिटल कंटेंट क्रिएटर और पत्रकार, जो सामाजिक-राजनीतिक, क्षेत्रीय और सांस्कृतिक घटनाक्रमों को डिजिटल दर्शकों के लिए सटीक व आकर्षक बनाती हैं