मंदिर में प्रवेश के बाद खौफनाक सजा, बाल काटे, जुते -चप्पल गले में बांधकर महिलाओं को अर्ध नग्न घुमाया
मुंबई। महाराष्ट्र के ठाणे जिले के उल्हासनगर में मानवता को शर्मसार करने वाली एक बेहद खौफनाक और विचलित करने वाली घटना सामने आई है। यहाँ विट्ठलवाड़ी (वाघरी नगर) इलाके में एक स्थानीय मंदिर में प्रवेश को लेकर हुए विवाद के बाद कुछ महिलाओं को सरेआम बेरहमी से पीटा गया, उनके कपड़े फाड़कर उन्हें अर्धनग्न किया गया, उनके बाल काट दिए गए और गले में चप्पलों की माला पहनाकर सड़क पर करीब दो किलोमीटर तक उनका जुलूस निकाला गया।
इस पूरी हैवानियत का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद इलाके में भारी आक्रोश फैल गया है और पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया है। पीड़ित महिलाओं को इलाज के लिए उल्हासनगर के सेंट्रल अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
पुलिस के अनुसार, यह पूरा विवाद एक ही समुदाय (वाघरी समुदाय) के दो परिवारों के बीच एक स्थानीय मंदिर में प्रवेश और पूजा-अर्चना को लेकर शुरू हुआ था। बताया जा रहा है कि एक स्थानीय जाति पंचायत ने पीड़ित परिवार के मंदिर प्रवेश पर पाबंदी लगा रखी थी। घटना वाले दिन मंदिर परिसर में एक धार्मिक कार्यक्रम और भंडारे का आयोजन किया जा रहा था।
पीड़ित परिवार के एक युवक ने इस पाबंदी का विरोध किया और कहा कि उनके परिवार ने कुछ गलत नहीं किया है, इसलिए उन्हें मंदिर जाने से नहीं रोका जाना चाहिए। इसके बाद वह युवक मंदिर परिसर के भीतर चला गया, जिससे वहां मौजूद दूसरे पक्ष के लोग भड़क गए। मंदिर से लौटने के बाद आरोपियों ने लाठी-डंडों और लोहे की रॉड से लैस होकर पीड़ित परिवार के घर पर हमला कर दिया और घर के पुरुषों के साथ मारपीट की।
इसके बाद जब पीड़ित महिलाएं (जिनमें 50 वर्षीय कांता प्रेम राजपूत, उनकी बहन गीता और बेटी अंजलि शामिल थीं) इस हमले की शिकायत दर्ज कराने के लिए पुलिस स्टेशन जा रही थीं, तभी आरोपियों ने उन्हें रास्ते में ही घेर लिया। आरोपियों ने बीच सड़क पर महिलाओं को घसीटा, उनके कपड़े फाड़ दिए, कैंची से उनके बाल काट दिए और फिर चप्पलों की माला पहनाकर सरेआम उनका जुलूस निकाला।
इसे भी पढ़ें: राम मंदिर चंदा चोरी: प्रियंका गांधी का सवाल क्या बड़े लोग भी शामिल?
इस दौरान आरोपियों ने कई लोगों को जबरन अपने पैर छूने पर भी मजबूर किया। बेहद हैरान करने वाली बात यह रही कि जब बीच सड़क पर महिलाओं के साथ यह हैवानियत हो रही थी, तब वहां मौजूद भीड़ तमाशबीन बनी रही और कुछ लोग इस पूरी घटना का वीडियो अपने मोबाइल में रिकॉर्ड करते रहे, लेकिन किसी ने भी महिलाओं को बचाने की कोशिश नहीं की।
पीड़ित परिवार ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि इतनी बड़ी घटना होने के बावजूद पुलिस ने शुरुआत में मामले को गंभीरता से नहीं लिया और कई घंटों की देरी के बाद एफआईआर दर्ज की। परिवार का यह भी कहना है कि महिलाओं की गरिमा और मानवाधिकारों के इतने गंभीर उल्लंघन के बावजूद पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ बेहद हल्की धाराएं लगाई हैं।
इस मामले पर उल्हासनगर के सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) शैलेश काले ने बताया कि यह घटना दो पक्षों के बीच मंदिर प्रवेश के पुराने विवाद और एक-दूसरे के देवी-देवताओं के कथित अपमान को लेकर हुई है। पुलिस ने केंद्रीय पुलिस स्टेशन में जूली वाघरी, वीनू वाघरी, पप्पी वाघरी, नितिन थोराट, रोहित वाघरी और सोनू उर्फ बालू वाघरी समेत सात नामजद और अन्य लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है।
पुलिस ने अब तक कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि मुख्य आरोपियों सहित अन्य की तलाश में छापेमारी की जा रही है। इसके साथ ही पुलिस घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है ताकि बाकी दोषियों की पहचान की जा सके।
Discover more from
Subscribe to get the latest posts sent to your email.
