“मथुरा के बाद अब अयोध्या में टूटेंगे घर,PWD ने चिपकाया नोटिस
लखनऊ। मथुरा में अवैध अतिक्रमण के खिलाफ हाल ही में हुई बड़ी कार्रवाई के बाद अब अयोध्या में भी प्रशासन ने सख्त रुख अपना लिया है।
अयोध्या में पीडब्ल्यूडी (लोक निर्माण विभाग) द्वारा सड़क चौड़ीकरण और सौंदर्यीकरण परियोजनाओं के तहत कई इलाकों में स्थित मकानों और दुकानों पर ध्वस्तीकरण के नोटिस चस्पा किए गए हैं। इनमें से कई मकान मालिक ऐसे हैं जो पिछले 100 वर्षों या उससे भी अधिक समय से वहां रह रहे हैं और उनके पास अपनी संपत्ति के पुश्तैनी होने के प्रमाण भी हैं।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह उनके पूर्वजों की ज़मीन है और प्रशासन बिना किसी उचित पुनर्वास या संतोषजनक मुआवज़े के उन्हें बेघर करने की कोशिश कर रहा है। विभाग की इस कार्रवाई का ज़ोरदार विरोध शुरू हो गया है, जहाँ लोगों का तर्क है कि वे दशकों से यहाँ रहकर टैक्स भर रहे हैं और अब अचानक उनके आशियानों को अवैध बताकर लाल निशान लगाना सरासर गलत है।
पीडब्ल्यूडी विभाग की ओर से जारी नोटिसों में स्पष्ट किया गया है कि ये निर्माण निर्धारित सड़क सीमा या सरकारी ज़मीन के भीतर आते हैं, जिन्हें हटाया जाना विकास कार्यों के लिए अनिवार्य है। विभाग ने प्रभावित लोगों को एक निश्चित समय सीमा के भीतर खुद ही अवैध हिस्सा हटाने का निर्देश दिया है, अन्यथा प्रशासन बुलडोजर का प्रयोग कर इन्हें ध्वस्त कर देगा।
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वहीं विरोध कर रहे मकान मालिकों का कहना है कि अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के बाद विकास के नाम पर प्राचीन मोहल्लों के अस्तित्व को खतरा पैदा हो गया है। कई बुजुर्ग निवासियों ने भावुक होते हुए कहा कि उन्होंने अपनी पूरी ज़िंदगी इसी छत के नीचे गुज़ारी है और इस उम्र में वे कहाँ जाएंगे।
आंदोलनकारियों ने सरकार से मांग की है कि यदि विकास के लिए ज़मीन ज़रूरी है, तो पहले उनके रहने की वैकल्पिक व्यवस्था की जाए और बाज़ार दर पर मुआवज़ा दिया जाए। फिलहाल इस मुद्दे को लेकर अयोध्या के कई क्षेत्रों में तनाव और अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है, जबकि प्रशासन सौंदर्यीकरण के रोडमैप को लागू करने पर अड़ा है।
हालांकि सवाल सिर्फ मथुरा और अयोध्या का ही नहीं है। उत्तर प्रदेश के मेरठ और बरेली में भी वर्षो पुरानी दुकानों को तोड़ने का मामला सामने आया है, जिसके लिए बरेली में कारोबारी लोग आंदोलन भी कर रहे हैं।
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