राजस्थान में AIMIM उम्मीदवारों को नहीं मिलेगा पतंग सिंबल, ये है वजह
नई दिल्ली: असदुद्दीन ओवैसी पार्टी AIMIM को राजस्थान चुनाव से पहले कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर पीठ ने उम्मीदवारों को पतंग चुनाव चिन्ह देने की मांग ख़ारिज कर दी है। इससे पहले चुनाव आयोग भी उनकी यह अपील ठुकरा चूका था। मुस्लिम वोटरों के भरोसे शहरी निकाय चुनाव में उतरी पार्टी के लिए यह बड़ा नुकसान है। अब उनके प्रत्याशियों को बिना एक तय सिंबल के ही चुनावी मैदान में उतरना पड़ेगा।
राजस्थान हाईकोर्ट से तत्काल राहत न मिलने के कारण आगामी शहरी निकाय चुनावों में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM के उम्मीदवार अपने आधिकारिक ‘पतंग’ चुनाव चिह्न पर चुनाव नहीं लड़ सकेंगे, जिससे उन्हें अब निर्दलीय के रूप में मैदान में उतरना होगा।
जयपुर हाईकोर्ट ने दो हफ्ते में जवाब तलब किया
राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा तेलंगाना में राज्य स्तरीय मान्यता का हवाला देकर सिंबल देने से इनकार करने के बाद पार्टी ने अदालत का रुख किया था, जहां जयपुर हाईकोर्ट ने दो हफ्ते में जवाब तलब किया है, लेकिन तब तक चुनाव प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। इस झटके के बाद अब AIMIM के प्रत्याशियों को चुनाव आयोग द्वारा तय किए गए 40 निर्दलीय चिह्नों (जैसे हाथ की चक्की, ऊंट या सिलाई मशीन) में से अलग-अलग सिंबल चुनने होंगे।
राजस्थान में 309 शहरी निकायों के लिए हो रहे इन चुनावों में AIMIM और हनुमान बेनीवाल की राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) गठबंधन कर जाट-मुस्लिम समीकरण के सहारे ‘तीसरे विकल्प’ के रूप में उतरी हैं, और सिंबल न मिलने के बावजूद 6 सितंबर को जयपुर में दोनों नेताओं की एक बड़ी साझा महारैली प्रस्तावित है।
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पतंग निशाना न मिलने से ओवैसी की पार्टी को जो नुकसान हुआ है उसका सीधा फायदा हनुमान बेनीवाल की पार्टी आरएलपी को मिल सकता है RLF के उम्मीदवार अपनी तय चुनाव चिन्ह पर ही मैदान में उत्तर रहे है।
हालांकि बड़े स्तर पर ओवेसी और बेनीवाल का एक साथ आना आसान दिख रहा है लेकिन जमीनी स्तर पर असली चुनौती दूसरी है। वार्ड और स्थानीय निकाय के चुनावो में जाट और मुस्लिम वोटरों को एक दूसरे के उम्मीदवारों की तरफ पूरी तरह मोड़ पाना इस नए गठबंधन की सबसे कठिन परीक्षा होगी।
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