अखिलेश यादव का तंज: सीएम योगी ने 7000 करोड़ का ‘कॉस्मेटिक फेशियल’ करवाया
अखिलेश यादव का तंज बोले मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ ने अपनी झूठी तस्वीर को सच्ची दिखने के लिए हज़ारो करोड़ रूपये पानी की तरह बहाए है
नई दिल्ली: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश सरकार के विज्ञापन खर्च और इंफ्रास्ट्रक्चर की गुणवत्ता को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर तीखा हमला बोला है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने जनता के टैक्स के करीब 7,000 करोड़ रुपये अपनी छवि चमकाने पर खर्च कर दिए, जबकि प्रदेश में शिक्षा, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं पर भारी निवेश की आवश्यकता है।
अखिलेश यादव का मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर हमला
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि मुख्यमंत्री ने अपनी झूठी छवि को सच्ची दिखाने के लिए हजारों करोड़ रुपये पानी की तरह बहाए हैं।
उन्होंने इसे प्रदेश के लिए अवांछनीय और निंदनीय करार देते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश आज भी गरीबी, बेरोजगारी, महंगाई, एमएसपी, बिजली, पानी, सड़क और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत समस्याओं से जूझ रहा है।
सपा प्रमुख ने दावा किया कि यदि यही राशि शिक्षा के क्षेत्र में लगाई जाती, तो ‘केजी से पीजी और रिसर्च’ तक की दो-तीन विश्वस्तरीय यूनिवर्सिटी स्थापित की जा सकती थीं, जिससे युवाओं का भविष्य संवर सकता था।
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उन्होंने यह भी कहा कि सपा की सरकार बनने पर शिक्षा और युवाओं को प्राथमिकता दी जाएगी और “नियो इंडिया” के तहत राज्य को तरक्की व खुशहाली के रास्ते पर ले जाया जाएगा।
एक्सप्रेसवे की गुणवत्ता को लेकर भी सरकार को घेरा
इसके अलावा, छह अगस्त को अखिलेश यादव ने लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे की गुणवत्ता को लेकर भी सरकार को घेरा। उद्घाटन के कुछ ही दिनों बाद सड़क धंसने और मरम्मत के दौरान पंखों से सड़क सुखाने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने पर उन्होंने तंज कसा।
उन्होंने वीडियो साझा करते हुए लिखा— ‘भाजपाई तरक्की की नई हवा’। सपा प्रमुख ने सवाल उठाया कि जिस एक्सप्रेसवे का हाल ही में उद्घाटन हुआ हो, उसे इतनी जल्दी बार-बार मरम्मत की क्यों जरूरत पड़ रही है।
उन्होंने हास्यास्पद स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि मरम्मत वाले हिस्से को सुखाने के लिए पंखों का उपयोग किया जा रहा है और ऐसे में उद्घाटन के दो-तीन सप्ताह के भीतर ही यदि सड़क बार-बार बैठ रही है, तो उस पर तेज रफ्तार से सफर करने का जोखिम कौन उठाएगा।
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