RBI की बैठक पर टिकी नजरें: 3 साल बाद दरों में बदलाव की आहट

RBI की बैठक पर टिकी नजरें: 3 साल बाद दरों में बदलाव की आहट

नई दिल्ली: मंहगाई और कच्चे तेल के बढ़ते दामों के बीच भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की बेहद अहम बैठक सोमवार से शुरू हो गई है। बाजार के जानकारों का मानना है कि इस बार कर्ज की ब्याज दरों में बढ़ोतरी का फैसला लिया जा सकता है।

साल 2025 में दरों में बड़ी कटौती करने के बाद, केंद्रीय बैंक ने पिछली चार बार से रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर ही रोक कर रखा था। मगर अब दुनिया भर के बदलते आर्थिक हालातों को देखते हुए कयास लगाए जा रहे हैं कि वर्ष 2023 के बाद पहली बार इसमें 0.25% का इजाफा किया जा सकता है।

RBI की यह समिति बुधवार को अपना अंतिम फैसला सुनाएगी, जिस पर निवेशकों और आम जनता की पैनी नजर है।

RBI और यूनियन बैंक का अनुमान

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार उच्च स्तर पर बनी हुई हैं, जहां ब्रेंट क्रूड लगभग 101.26 डॉलर प्रति बैरल और क्रूड ऑयल करीब 89.98 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है।

इन ऊंची कीमतों और मुद्रास्फीति के बढ़ते जोखिमों ने केंद्रीय बैंक को मौद्रिक कड़ाई की दिशा में कदम उठाने के लिए प्रेरित किया है। देश-विदेश की प्रमुख वित्तीय संस्थाओं और शोध एजेंसियों ने भी अपने आकलन जारी किए हैं।

यूनियन बैंक ऑफ इंडिया का मानना है कि आरबीआई अक्टूबर की बैठक में रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट्स की बढ़ोतरी कर सकता है और वित्त वर्ष की शेष बैठकों में इसे 5.75 से 6.00 प्रतिशत तक ले जाया जा सकता है।

वहीं, एसबीआई रिसर्च के अनुसार, आने वाले महीनों में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित महंगाई 6.5 प्रतिशत के पार जा सकती है, इसलिए अक्टूबर और दिसंबर दोनों बैठकों में 25-25 बेसिस प्वाइंट्स की बढ़ोतरी कर नीतिगत सुरक्षा चक्र तैयार किया जाना चाहिए।

इससे पहले अगस्त 2026 की नीतिगत बैठक में एमपीसी ने रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर बरकरार रखते हुए अपने रुख को ‘न्यूट्रल’ रखा था। वर्तमान में स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी दर 5.0 प्रतिशत, जबकि मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी दर और बैंक दर 5.5 प्रतिशत पर बनी हुई है।

गवर्नर संजय मल्होत्रा ने पूर्व में स्पष्ट किया था कि खाद्य और ईंधन की आपूर्ति-पक्षीय समस्याओं के कारण हेडलाइन इन्फ्लेशन में बढ़ोतरी की उम्मीद है, हालांकि कोर इन्फ्लेशन मध्यम स्तर पर है।

रिजर्व बैंक की यह बैठक देश के बाजारों और आम जनता के लिए बहुत बड़ा मोड़ साबित हो सकती है। लगातार बढ़ रही मंहगाई और अंतरराष्ट्रीय बाजार में मंहगे होते कच्चे तेल के बीच, 7 अक्टूबर को आने वाले फैसले से रिजर्व बैंक का रुख बिल्कुल साफ हो जाएगा।

इस दिन यह तय होगा कि केंद्रीय बैंक देश में पैसों के बहाव को नियंत्रित करने के लिए ब्याज दरों में बढ़ोतरी का कड़ा कदम उठाया है या फिर मौजूदा व्यवस्था को ही जारी रखता है।


Discover more from

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

Mehak B