लाठीचार्ज का आरोप: दीपके ने सरकार और पुलिस को घेरा
अभिजीत दीपके के अनुसार, कल दिल्ली पुलिस की बर्बरता में 12 साल की बच्चियों के सिर तक फोड़ दिए गए
नई दिल्ली: कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रमुख अभिजीत दीपके ने संसद मार्च के दौरान दिल्ली पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई पर गंभीर आरोप लगाते हुए इसे बर्बर और सुनियोजित करार दिया है।
मीडिया से बातचीत में उन्होंने दावा किया कि पुलिस ने नाबालिगों तक को नहीं छोड़ा और पुरुष पुलिसकर्मियों द्वारा 12 साल की बच्चियों के सिर फोड़ दिए गए।
उन्होंने आरोप लगाया कि एक घायल लड़की आरएमएल अस्पताल में गंभीर हालत में भर्ती है, जिसकी गर्दन पर पुलिस ने लाठी मारी थी।
दीपके ने स्पष्ट किया कि यदि उसे कुछ भी होता है तो इसकी पूरी जिम्मेदारी दिल्ली पुलिस और केंद्र सरकार की होगी।
उन्होंने कहा कि प्रदर्शन को रोकने के लिए वॉटर कैनन का प्रयोग किया जा सकता था, लेकिन लाठीचार्ज करके भगदड़ मचाई गई।
अभिजीत दीपके ने दिल्ली पुलिस की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए घटना को एक सोची-समझी साजिश बताया।
इसे भी पढ़ें: 14 बार अंदरूनी विरोध: ज्ञानेश कुमार के एकतरफा फैसलों पर क़ानूनी जंग
उन्होंने कहा कि एक महीने से जारी शांतिपूर्ण प्रदर्शन में पहली बार हिंसक कार्रवाई पुलिस की तरफ से हुई।
उन्होंने सवाल उठाया कि कड़ी सुरक्षा और हर तरफ बैरिकेडिंग के बावजूद जंतर-मंतर के आसपास पत्थरों से भरे ट्रक कैसे पहुंचे।
इसके अलावा, उन्होंने यह गंभीर आरोप भी लगाया कि सादे कपड़ों में आए कुछ लोगों को पुलिस की वर्दी पहनाकर और हाथ में लाठियां देकर प्रदर्शनकारियों पर हमला कराया गया।
गौरतलब है कि सोमवार को सीजेपी द्वारा निकाले गए संसद मार्च को रोकने के लिए पुलिस ने जंतर-मंतर पर भारी बैरिकेडिंग की थी।
जब प्रदर्शनकारियों ने आगे बढ़ने का प्रयास किया, तो पुलिस ने लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोलों का इस्तेमाल किया, जिससे संसद के बाहर काफी तनावपूर्ण स्थिति पैदा हो गई।
प्रदर्शनकारियों द्वारा संसद परिसर की ओर बढ़ने की कोशिश के बाद मेन गेट को बंद कर दिया गया और सुरक्षा व्यवस्था बेहद सख्त कर दी गई। इस पूरी झड़प और लाठीचार्ज में कई प्रदर्शनकारी गंभीर रूप से घायल हुए हैं।
Discover more from
Subscribe to get the latest posts sent to your email.
