14 बार अंदरूनी विरोध: ज्ञानेश कुमार के एकतरफा फैसलों पर क़ानूनी जंग
नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कर चुनाव आयोग के फैसलों पर गंभीर सवाल उठाए गए है। याचिका में आरोप लगाया गया है। कि मुख्य चुनाव आयुक्त देश की इतनी बड़ी संस्था के नाम पर कई ऐसे फैसले अकेले ही ले रहे है, जिन्हें बाकि दोनो चुनाव आयुक्तों—सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी—की मंजूरी हासिल नहीं है।
राकेश कुमार सिंह द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई एक याचिका में ‘क्वो वारंटो’ रिट जारी करने की मांग की गई है, जिसके जरिए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से यह स्पष्ट करने को कहा गया है कि उन्होंने किस अधिकार के तहत उन शक्तियों का इस्तेमाल किया, जो संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत सामूहिक रूप से चुनाव आयोग को प्राप्त हैं।
शक्तियों पर अकेले कब्ज़े का आरोप
याचिका में आरोप लगाया गया है कि चुनाव आयोग में शक्तियों का धीरे-धीरे केंद्रीकरण हो रहा है और 28 अक्टूबर 2025 से 14 अगस्त 2026 के बीच दोनों चुनाव आयुक्तों (सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी) ने आयोग की मंजूरी के बिना लिए गए फैसलों और उठाए गए कदमों पर कम से कम 14 बार आपत्तियां दर्ज कराई थीं, क्योंकि मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त अधिनियम, 2023 के तहत बहुसदस्यीय निकाय के रूप में चुनाव आयोग के सभी फैसले जहां तक संभव हो सर्वसम्मति से या फिर बहुमत की राय के आधार पर लिए जाने चाहिए।
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विपक्ष ने कोर्ट में याचिका दायर कर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के फैसलों की क़ानूनी वैधता पर बड़े सवाल उठाए है। को वारंटों रिट के जरिए मांग की गई गई कि मुख्य चुनाव आयुक्त यह साफ़ करें कि उन्होंने किस अधिकार से ये फैसले लिए।
याचिका के मुताबिक, अगर मुख्य चुनाव आयुक्त ने साल 2023 के अधिनियम की धारा 18 का उल्लंघन कर, बाकि आयुक्तों की सहमति के बिना अकेले ही आयोग की शक्तियों का इस्तेमाल किया है, तो उनके ऐसे फैसलों को अमान्य किया जाना चाहिए। साथ ही वोटर लिस्ट ही जाँच के तहत अब तक उठाए गए सभी कदमो को पूरी तरह से अवैध और शून्य घोषित करने की मांग की गई है।
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