दल-बदल विरोधी कानून पर लोकसभा में स्थगन प्रस्ताव, मनीष तिवारी ने दिया नोटिस
कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने देश में एक नए और प्रभावी दल-बदल विरोधी कानून की आवश्यकता पर चर्चा कराने के लिए आज लोकसभा में स्थगन प्रस्ताव का नोटिस दिया है
नई दिल्ली: देश की राजनीति में विधायकों और सांसदों के बार-बार दल बदलने की प्रवृत्ति और राजनीतिक अस्थिरता को देखते हुए, वरिष्ठ कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने आज लोकसभा में नए और सख्त दल-बदल विरोधी कानून (Anti-Defection Law) की तत्काल आवश्यकता पर चर्चा कराने के लिए स्थगन प्रस्ताव (Adjournment Motion) का नोटिस दिया है।
तिवारी ने अपने नोटिस में इस बात पर गहरा तनाव व्यक्त किया कि 1985 में संविधान की 10वीं अनुसूची के तहत लागू किया गया मौजूदा दल-बदल विरोधी कानून वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों में अप्रभावी और लचर साबित हो रहा है।
उन्होंने कहा कि मौजूदा कानून में मौजूद कानूनी कमियों (loopholes) का फायदा उठाकर नेता आसानी से जनता के जनादेश को नजरअंदाज करते हैं और अपनी सुविधा के अनुसार दल बदल लेते हैं।
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इससे न केवल लोकतांत्रिक संस्थाओं की साख गिर रही है, बल्कि सरकारों की स्थिरता पर भी बार-बार संकट मंडराता है।
मनीष तिवारी ने मांग की कि सदन की अन्य सभी निर्धारित कार्यवाहियों को रोककर इस गंभीर विषय पर प्राथमिकता के साथ विस्तृत बहस कराई जाए।
उन्होंने संसद से एक ऐसे व्यापक और आधुनिक कानून को तैयार करने की अपील की, जिसमें स्पीकर (अध्यक्ष) के अधिकारों, दलबदल की समयावधि और अयोग्य ठहराए जाने के कड़े नियमों को स्पष्ट और निष्पक्ष रूप से परिभाषित किया जा सके, ताकि राजनीतिक शुचिता और लोकतंत्र की नींव को मजबूत रखा जा सके।
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