अंकित केस: राहुल गांधी का केंद्र पर वार, पूछा न्याय मांगने वालो को हिरासत में क्यों लिया
नई दिल्ली: कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मोदी सरकार पर बड़ा आरोप लगाते हुए कहा है कि पीड़ितो की आवाज को कुचलना ही इस शासन का असली चेहरा है। यह बयान उन्होंने उत्तराखंड की अंकिता भंडारी के माता-पिता को पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने के विरोध में दिया। राहुल गांधी के अनुसार, मौजूदा सरकार अपनी कमियों पर सवाल उठाने वालों को डराकर या हटाकर चुप कराना चाहती है।
उन्होंने बेटी के न्याय के लिए भटक रहे परिवार के साथ हुए इस व्यवहार को अमानवीय बताया। साथ ही, उन्होंने भरोसा दिया कि वे और उनकी पार्टी पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए हमेशा उनके साथ मजबूती से खड़े रहेंगे।
इंडिया गेट पर प्रदर्शन और हिरासत
अंकिता भंडारी के माता-पिता को गुरुवार सुबह करीब पांच बजे रिहा कर दिया गया, जिन्हें इससे कुछ घंटे पहले इंडिया गेट के पास सिक्किम के राज्यपाल के रूप में दुष्यंत कुमार गौतम की नियुक्ति के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने पर हिरासत में ले लिया गया था।
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इस कार्रवाई की कड़ी निंदा करते हुए ‘एक्स’ पर लिखा कि आधी रात को माता-पिता को उठाना इस सरकार की दमनकारी पहचान है, जो पीड़ितों की आवाज दबाना चाहती है, जबकि अंकिता के परिवार की मांग है कि सीबीआई जांच पूरी होने तक गौतम की नियुक्ति रोकी जाए क्योंकि उनका आरोप है कि इस वीआईपी एंगल मामले में गौतम की भी भूमिका थी।
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हालांकि अंकिता भंडारी हत्याकांड (जिसमें 18 सितंबर 2022 को ऋषिकेश के वनंत्रा रिसॉर्ट में उसकी हत्या कर दी गई थी और मुख्य आरोपी पुलकित आर्य व उसके साथियों को उम्रकैद की सजा सुनाई जा चुकी है) के माता-पिता के साथ-साथ पवन खेड़ा, इमरान प्रतापगढ़ी, सुप्रिया श्रीनेत और उदय भानु चिब जैसे कई कांग्रेस नेताओं को भी हिरासत में लेकर बाद में छोड़ दिया गया, लेकिन अंकिता के पिता ने चेतावनी दी है कि मांगें पूरी न होने पर देशव्यापी आंदोलन शुरू किया जाएगा और कांग्रेस पार्टी न्याय मिलने तक परिवार के साथ खड़ी रहेगी।
कांग्रेस का दावा है कि क़ानूनी कार्यवाई से बचाने के लिए ही यह नई नियुक्ति की गई है, क्योकि नियम के मुताबिक पद पर रहते हुए किसी भी राज्यपाल पर आपराधिक मुकदमा नहीं चलाया जा सकता। विपक्ष का आरोप है कि विवादों से ध्यान भटकाने के लिए सरकार ने यह रास्ता चुना है।
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