असम UCC बिल पर ओवैसी का बड़ा हमला, बताया संविधान और मुस्लिम अधिकारों के खिलाफ

असम UCC बिल पर ओवैसी का बड़ा हमला, बताया संविधान और मुस्लिम अधिकारों के खिलाफ

असम सरकार द्वारा विधानसभा में ‘समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक, 2026’ पेश किए जाने के बाद देश में इस पर राजनीतिक घमासान तेज़ हो गया है। एआईएमआईएम (AIMIM) प्रमुख और हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने इस कानून को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखा हमला बोला है।

हैदराबाद। असम विधानसभा में मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की सरकार द्वारा ‘समान नागरिक संहिता (UCC) असम, 2026’ विधेयक पेश किए जाने के बाद ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई है।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर एक विस्तृत पोस्ट साझा करते हुए ओवैसी ने इस कानून को भेदभावपूर्ण और असंवैधानिक करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि यूसीसी के नाम पर असल में “पिछले दरवाजे से मुसलमानों पर हिंदू पर्सनल लॉ थोपने की कोशिश” की जा रही है।

“यह ‘यूनिफॉर्म’ यानि समान कानून नहीं है”

असादुद्दीन ओवैसी ने बिल के ड्राफ्ट पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसे किसी भी कीमत पर ‘समान’ नागरिक संहिता नहीं कहा जा सकता।

आदिवासियों को छूट क्यों?:

ओवैसी ने कहा कि यह बिल असम के अनुसूचित जनजाति (ST) समुदायों को इसके दायरे से पूरी तरह बाहर रखता है। उन्होंने सवाल किया, “संविधान के अनुच्छेद 29 के तहत हर समुदाय को अपनी संस्कृति की रक्षा करने का अधिकार है। लेकिन यहाँ सिर्फ आदिवासियों की स्वायत्तता की रक्षा की जा रही है, जबकि मुसलमानों को इन तथाकथित समान नियमों का पालन करने के लिए मजबूर किया जा रहा है। अगर यह कानून सबके लिए है, तो इसे चुनिंदा तरीके से क्यों लागू किया जा रहा है?”

बेटियों के अधिकारों के साथ खिलवाड़ का दावा:

ओवैसी ने बिल में वसीयत (Will) से जुड़े प्रावधानों पर भी निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत कोई भी व्यक्ति अपनी पूरी संपत्ति किसी एक बेटे को नहीं दे सकता या बेटी को उसके हिस्से से पूरी तरह वंचित नहीं कर सकता। लेकिन इस नए यूसीसी बिल के आने के बाद कोई भी व्यक्ति अपनी मर्जी से वसीयत लिखकर बेटियों को उनकी पैतृक संपत्ति के अधिकार से बेदखल कर सकता है। ऐसे में यह कानून महिलाओं को न्याय देने वाला बिल्कुल नहीं है।

संविधान निर्माताओं की सोच के खिलाफ:

AIMIM प्रमुख ने स्पष्ट किया कि भारतीय संविधान सभा (Constituent Assembly) ने कभी भी देश में अनिवार्य रूप से यूसीसी लागू करने की कल्पना नहीं की थी। यह एक ऐसा कानून है जिसे बिना जनता और संबंधित समुदायों की इच्छा के ज़बरदस्ती लागू किया जा रहा है।

बहुविवाह पर रोक और अनिवार्य रजिस्ट्रेशन का है प्रावधान

बता दें कि असम सरकार द्वारा पेश किए गए यूसीसी बिल में बहुविवाह (Polygamy) पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने, शादी और तलाक का 60 दिनों के भीतर अनिवार्य पंजीकरण कराने, तथा लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले जोड़ों के लिए 30 दिनों के भीतर रजिस्ट्रेशन को ज़रूरी बनाने जैसे कड़े प्रावधान शामिल किए गए हैं।

जहां असम की बीजेपी सरकार इसे महिलाओं की सुरक्षा और लैंगिक समानता की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बता रही है, वहीं ओवैसी और अन्य विपक्षी दल इसे अल्पसंख्यकों के धार्मिक अधिकारों में दखल मान रहे हैं।


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Raja Zaid

"राजा ज़ैद एक जाने-माने पत्रकार हैं। उन्हें देश के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ राजनीति और सामायिक विषयो की कवरेज का 15 वर्षो से अधिक का अनुभव है।