बीजेपी नेता हाजी अराफात का नितेश राणे पर बड़ा हमला: बोले- ‘मटन छोड़ कागज खाकर देखें, आपके पिता की भी मांस की दुकान थी
आगामी ईद-उल-अजहा (बकरीद) के त्योहार से पहले महाराष्ट्र की राजनीति में बयानों के तीखे तीर चलने शुरू हो गए हैं। दिलचस्प बात यह है कि इस बार यह टकराव सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच नहीं, बल्कि सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) के ही दो नेताओं के बीच खुलकर सामने आ गया है।
मुंबई। बीजेपी के वरिष्ठ अल्पसंख्यक नेता और पूर्व वक्फ बोर्ड अध्यक्ष हाजी अराफात शेख ने अपनी ही पार्टी के फायरब्रांड विधायक नितेश राणे के बयानों और हरकतों पर गहरी नाराजगी जताई है। उन्होंने नितेश राणे को इतिहास की याद दिलाते हुए नसीहत दी है कि वे त्योहार के माहौल को खराब न करें।
“मटन की जगह कागज खाकर देखें स्वाद कैसा होता है”
मीडिया से बातचीत करते हुए हाजी अराफात शेख ने बेहद आक्रामक और व्यंग्यात्मक लहजे में नितेश राणे पर निशाना साधा। उन्होंने कहा:
“नितेश राणे को अब थोड़ा समझना चाहिए। सामने ईद का बड़ा त्योहार है, और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि उनका खुद का भी मांस (meat) का कारोबार है। उनके पिता (नारायण राणे) ने कभी एक मांस की दुकान से ही अपने करियर की शुरुआत की थी। वहां से संघर्ष करके उन्होंने मुख्यमंत्री और मंत्री पद तक का सफर तय किया और केंद्र सरकार में एक उच्च पदस्थ व्यक्ति बने।”
उन्होंने कहा कि “चेंबूर में आज भी उनका अपना एक बड़ा होटल है, जिसका नाम उनकी मां के नाम पर रखा गया है। वहां बेहतरीन केकड़ा, बेहतरीन मछली और स्वादिष्ट मटन मसाला मिलता है।”
अराफात ने आगे तंज कसते हुए कहा, “इसलिए नितेश राणे, आपको यह सब समझना होगा। ज़रा अपनी मटन की दुकान और अपने होटल को तो देखिए। अगर आप हर रविवार को चाव से मटन खाते हैं, तो कभी मटन की जगह कागज खाकर देखिए, तब आपको पता चलेगा कि उसका स्वाद कैसा होता है। मैं जब भी आपके चेंबूर वाले होटल जाता हूं, तो वहां का खाना सच में बहुत स्वादिष्ट होता है, खासकर बढ़िया मटन मलाई…”
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हिंदू कसाई और धनगर समुदाय भी परेशान: हाजी अराफात
हाजी अराफात शेख ने त्योहार के मौके पर पशुओं के परिवहन (Transportation) में आ रही दिक्कतों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि नितेश राणे की राजनीति के कारण सिर्फ एक समुदाय का नुकसान नहीं हो रहा है।
उन्होंने कहा, “मैं नितेश राणे से साफ कहना चाहूंगा कि बकरियों और मवेशियों को ले जाने वाले वाहनों को जगह-जगह बेवजह रोका जा रहा है। इससे सिर्फ मुस्लिम ही नहीं, बल्कि हिंदू कसाइयों को भी बहुत कष्ट हो रहा है।”
अराफात ने कहा कि इस कार्रवाई से महाराष्ट्र का ‘धनगर समुदाय’ (जो मुख्य रूप से भेड़-बकरी पालन के व्यवसाय से जुड़ा है) भी बेहद परेशान है। कसाई समुदाय को साल में केवल एक बार (ईद के वक्त) बड़े पैमाने पर कमाने का मौका मिलता है।
पिता नारायण राणे से सलाह लेने की दी नसीहत
हाजी अराफात शेख ने नितेश राणे को बचकानी राजनीति छोड़कर अपने पिता और पूर्व केंद्रीय मंत्री नारायण राणे से राजनीतिक समझ सीखने की सलाह दी। उन्होंने कहा, “चेंबूर में आपकी दुकान और होटल में तो अच्छा कारोबार चल रहा है, इसलिए हमारे और गरीब कसाइयों के कारोबार का भी थोड़ा ध्यान रखें। मैं उनसे कहूंगा कि वे कोई भी बयान देने से पहले अपने पिता नारायण राणे से सलाह लें, वे वरिष्ठ नेता हैं।”
बयान के अंत में अराफात ने कड़वाहट को कम करते हुए कहा कि वे नितेश राणे को ईद की अग्रिम शुभकामनाएं देते हैं और उन्हें अपने घर पर ईद के खास मटन की दावत खाने का खुला निमंत्रण भी देते हैं।
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