आसाराम की आजीवन कारावास की सजा बरकरार

आसाराम की आजीवन कारावास की सजा बरकरार

आसाराम बापू को राजस्थान हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। अदालत ने उनकी आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा है। 

नई दिल्ली। खबर के अनुसार, धर्म की आड़ में धंधा फैलाने वाले आसाराम बापू को राजस्थान हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है।

आसाराम पर लगे गंभीर आरोपों की वजह से निचली अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी, और अब राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर पीठ की डिवीजन बेंच ने आसाराम की अपील को नकारते हुए इस आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा है। इस मामले में आसाराम को कोई बड़ी राहत नहीं मिली है।

राजस्थान हाइकोर्ट की जोधपुर बेंच के जस्टिस अरुण मोंगा और जस्टिस योगेंद्र कुमार पुरोहित ने अपने फैसले में उनकी उम्रकैद की सजा को जारी रखने का आदेश दिया है।

हालांकि, अदालत ने आसाराम को IPC 1860 की धारा 376 D (वर्तमान BNS 2023 की धारा 70) के तहत लगे गैंगरेप के आरोपों से बरी कर दिया है, क्योंकि उपलब्ध सबूत गैंगरेप साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं पाए गए। इसके बावजूद, नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में उनके दोषों और आरोपों को पूरी तरह कायम रखा गया है।

साल 2018 में विशेष POCSO अदालत ने पाक्सो के प्रावधानों के तहत आसाराम को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। फिलहाल आसाराम पेरोल पर बाहर हैं, लेकिन हाईकोर्ट के आदेशानुसार उन्हें तुरंत सरेंडर करना होगा और जेल भेजा जाएगा।

इसी मामले में सह-आरोपी शिल्पी और शरतचंद की अपीलों पर भी कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए उन्हें राहत दी है। निचली अदालत ने इन्हें भी इस अपराध में भागीदार माना था, लेकिन हाईकोर्ट ने साक्ष्यों की समीक्षा के बाद माना कि इस मामले में सामूहिक रूप से किसी साजिश या गैंगरेप की बात सिद्ध नहीं होती है।

साल 2013 से पहले आसाराम का देश में बड़ा नाम और प्रभाव था, लेकिन इसी साल जोधपुर स्थित आश्रम में एक नाबालिग छात्रा से दुष्कर्म का आरोप लगने के बाद इस पूरे मामले की शुरुआत हुई। उस वक्त आसाराम का प्रभाव बहुत ज्यादा था, लेकिन पीड़िता के माता-पिता दबावों के आगे नहीं झुके और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद आसाराम और उनके आश्रमों के खिलाफ जांच शुरू हुई थी। इसके बाद साल 2018 में विशेष पॉक्सो अदालत ने उन्हें दोषी ठहराया और उम्रकैद की सजा सुनाई।

आसाराम ने इस फैसले को अपने साथ अन्याय मानते हुए इसके खिलाफ राजस्थान हाईकोर्ट में अपील दायर की थी, जिस पर अब यह ताजा निर्णय आया है। अब आसाराम के शिष्यों की मांग है कि वे इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएं।

कानूनन आसाराम चाहें तो अब हाईकोर्ट के इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर कर सकते हैं, जहां शीर्ष अदालत सबूतों और साक्ष्यों के आधार पर इस मामले में अपना अंतिम फैसला सुनाएगी।


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Raja Zaid

"राजा ज़ैद एक जाने-माने पत्रकार हैं। उन्हें देश के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ राजनीति और सामायिक विषयो की कवरेज का 15 वर्षो से अधिक का अनुभव है।