अयोध्या दान विवाद: कांग्रेस ने प्रधानमंत्री से मांगा जवाब, सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग
अयोध्या: राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी के आरोपों पर कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से स्पष्ट रुख अपनाने की मांग की है। पार्टी के महासचिव जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि मौजूदा जांच में रसुखदार लोगो को जानबूझकर बचाया जा रहा है।
उन्होंने कहा की प्रधानमंत्री इस मुद्दे पर शांत रहते है तो इसे गलत काम करने वालो को उनका सीधा संरक्षण माना जाएगा। कांग्रेस ने मामले की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट की देखरेख में इसकी पारदर्शी जांच कराने की मांग उठाई है।
एसआईटी जांच और देरी पर सवाल
कांग्रेस नेता ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में मामले को “चंदा चोरी, आस्था धोखा” करार देते हुए एसआईटी जांच और सरकारी लीपापोती पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि चार जून को गणना कक्ष के बाथरूम से 2.25 लाख रुपये मिलने का वीडियो ट्रस्ट के तत्कालीन महासचिव चंपत राय को भेजे जाने और अगले दिन सीसीटीवी फुटेज दिखाए जाने के बावजूद, 25 जून को प्राथमिकी दर्ज होने में 21 दिन क्यों लगे।
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उन्होंने यह भी सवाल किया कि चढ़ावे की रकम छिपाने की 105 घटनाएं सामने आने के बाद भी जांच सिर्फ आठ आरोपियों तक क्यों सीमित रही और चंपत राय, अनिल मिश्रा तथा गोपाल राव को आरोपी बनाने के बजाय गवाह क्यों बनाया गया। रमेश के अनुसार, मंदिर प्रबंधन से जुड़े लोगों की भूमिका की जांच के बिना सच्चाई सामने नहीं आ सकती और उन्होंने यह भी आशंका जताई कि क्या इस मामले के तार भाजपा-आरएसएस के शीर्ष नेतृत्व से जुड़े हैं।
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने जांच को केवल निचले स्तर के कर्मचारियों तक समिति रखकर मुख्य जिम्मेदारी को बचा लिया है। जयराम रमेश का कहना है कि भगवान् राम के नाम पर आए दान में हुई इस हेराफेरी के असली दोषियों को पकडे बिना और पूरी व्यवस्था को जवाबदेही तय किए बिना इस मामले को बंद नहीं किया जा सकता।
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