बांकीपुर उपचुनाव: शुरुआती रुझानों में प्रशांत किशोर आगे
बांकीपुर उपचुनाव के शुरुआती रुझानों में जन सुराज के प्रशांत किशोर ने बढ़त बनाकर राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है
पटना: बिहार की सियासत में हॉट सीट मानी जाने वाली बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव की मतगणना में शुरुआती दौर से ही दिलचस्प मुकाबला देखने को मिल रहा है।
कुल 31 राउंड की गिनती में से शुरुआती 5 राउंड पूरे होने के बाद जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने अपनी मजबूत पकड़ बनाते हुए भाजपा उम्मीदवार नीरज कुमार पर 2,319 वोटों की महत्वपूर्ण बढ़त हासिल कर ली है।
पाँचवें राउंड के ताजा आंकड़ों के अनुसार, प्रशांत किशोर को कुल 8,971 वोट मिले हैं, जबकि भाजपा के नीरज कुमार 6,652 वोटों के साथ दूसरे पायदान पर चल रहे हैं।
वहीं, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) की उम्मीदवार रेखा कुमारी को अब तक सिर्फ 1,534 वोट ही मिल पाए हैं, जिससे शुरुआती रुझानों में राजद काफी पिछड़कर तीसरे स्थान पर सिमटती नजर आ रही है।
अन्य दलों के प्रत्याशी और निर्दलीय उम्मीदवार रेस से काफी पीछे छूट चुके हैं, जिससे मुकाबला मुख्य रूप से जन सुराज और भाजपा के बीच सिमट गया है।
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इससे पहले के राउंड्स पर नजर डालें तो, पहले राउंड से ही प्रशांत किशोर ने बढ़त बनाने का सिलसिला शुरू कर दिया था। पहले राउंड में प्रशांत किशोर ने 2,220 वोट हासिल कर भाजपा उम्मीदवार (1,423 वोट) पर 797 मतों की बढ़त बनाई थी, जबकि राजद उम्मीदवार को 501 वोट मिले थे।
दूसरे राउंड में जन सुराज को 1,570 और भाजपा को 1,211 वोट मिले, जिससे अंतर बढ़कर 359 वोटों का हो गया। तीसरे राउंड तक आते-आते यह बढ़त 1,162 वोटों (प्रशांत किशोर: 5,032, भाजपा: 3,870) तक पहुंच गई और राजद की रेखा कुमारी 767 वोटों के साथ पीछे रह गईं।
चौथे राउंड में यह फासला और चौड़ा हुआ, जहां प्रशांत किशोर 6,269 वोटों के साथ भाजपा (5,124 वोट) से 1,145 वोटों से आगे रहे, और आखिरकार पाँचवें राउंड में यह बढ़त बढ़कर 2,319 वोटों तक पहुंच गई।
चूंकि बांकीपुर विधानसभा सीट को लंबे समय से भाजपा का पारंपरिक और मजबूत गढ़ माना जाता रहा है, ऐसे में यहाँ जन सुराज पार्टी का यह शुरुआती प्रदर्शन राजनीतिक गलियारों में चर्चा का बड़ा विषय बन गया है।
हालांकि, अभी 31 में से अधिकांश राउंड की गिनती बाकी है, जिसके चलते आने वाले समय में चुनावी समीकरणों और वोटों के अंतर में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। सभी राजनीतिक दलों और विश्लेषकों की निगाहें अब अगले दौर के परिणामों पर टिकी हुई हैं।
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