नई दिल्ली: बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा बेंच ने 6 अगस्त 2026 को तहलका पत्रिका के पूर्व संपादक 62 वर्षीय तरुण तेजपाल को 2013 के एक मामले में कनिष्ठ सहकर्मी के साथ दुष्कर्म का दोषी ठहराते हुए 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी, जिसके जरिए जस्टिस डॉ. नीला गोखले और जस्टिस अमित जामसंदेकर की डिवीजन बेंच ने गोवा सरकार की अपील स्वीकार करते हुए 2021 में निचली अदालत द्वारा उन्हें बरी किए जाने के फैसले को रद्द कर दिया था।
अपने खिलाफ लगे आरोपों को राजनीतिक प्रतिशोध बताने वाले तेजपाल ने इस फैसले के खिलाफ 20 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट का रुख कर सजा पर रोक लगाने की मांग की थी, लेकिन शीर्ष अदालत ने शुक्रवार को उनकी सजा पर रोक लगाने के अनुरोध को स्वीकार नहीं किया।
‘तहलका’ पत्रिका के पूर्व संपादक तरुण तेजपाल पर साल 2013 में गोवा के एक नामी होटल की लिफ्ट में अपनी सहकर्मी का यौन उत्पीड़न करने का गंभीर आरोप लगा था। गोवा पुलिस ने इस मामले में पद के दुरुपयोग और बंधक बनाने जैसी संगीन धाराओं के तहत लगभग 3,000 पन्नों का आरोपपत्र दाखिल किया था।
हालांकि तेजपाल ने खुद को पूरी तरह बेकसूर बताते हुए इन आरोपों को खारिज कर दिया था, जिसके बाद अभियोजन पक्ष के 156 गवाहों में से करीब 70 गवाहों से कोर्ट में लंबी जिरह की गई।
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संजना कुमारी: रियल-टाइम खबरों पर मजबूत पकड़ रखने वाली डिजिटल कंटेंट क्रिएटर और पत्रकार, जो सामाजिक-राजनीतिक, क्षेत्रीय और सांस्कृतिक घटनाक्रमों को डिजिटल दर्शकों के लिए सटीक व आकर्षक बनाती हैं