प्रियंका ने ली अपने हाथ में कमान, उत्तर प्रदेश में सीटों के बंटवारे की बात अंतिम दौर में
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच अंतिम दौर की वार्ता बाकी है। कांग्रेस सूत्रों की माने तो मुख्यतः बातचीत सपा के अध्यक्ष अखिलेश यादव और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी के बीच चल रही है। अब बातचीत में प्रदेश अध्यक्ष आराधना मिश्रा मोना के अलावा कांग्रेस का कोई और नेता शामिल नहीं है।
सूत्रों ने कहा कि सीटों के दावे को लेकर कांग्रेस नेताओं की तरफ से आ रहे परस्पर विरोधी बयानों को ब्रेक लगाते हुए सपा से बातचीत के लिए स्वयं प्रियंका गांधी को एक्टिव होना पड़ा। यही कारण है कि फ़िलहाल सीटों के बंटवारे को लेकर सिर्फ कयास ही लगाए जा रहे हैं और कांग्रेस की दूसरी पंक्ति के नेताओं को बातचीत की भनक तक नहीं लगने दी गई है।
प्रियंका गांधी के एक्टिव होने के बाद सीटों की तादाद को लेकर बड़े दावे करने वाले कांग्रेस नेताओं के बयानों में नरमी आई है। अब प्रदेश कांग्रेस प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम और कार्यकारी अध्यक्ष इमरान मसूद सीटों की संख्या को लेकर कोई भी दावा करने से परहेज कर रहे हैं।
वैसे अगर सूत्रों से आ रही खबरों को सच माना जाए तो अब कांग्रेस 50 से 70 सीटों के बीच मोल भाव कर रही है और माना जा रहा है कि अखिलेश कांग्रेस को 50 तक सीटें दे सकते हैं। हालांकि कांग्रेस ने अब जो नई सूची अखिलेश के समक्ष रखी है वह 72 सीटों की है।
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सूत्रों की माने तो इस नई सूची में कांग्रेस सांसदों के जिलों की दो तिहाई सीटों पर दावा किया गया है। इनमे अमेठी, रायबरेली, सहारनपुर, प्रयागराज, सीतापुर और बाराबंकी जनपद शामिल हैं।
इसके अलावा स्वार, बिलासपुर (रामपुर),हापुड़, स्याना (बुलंदशहर), मांट, मथुरा सदर (मथुरा), मड़िहान (मिर्ज़ापुर), पिंडरा (वाराणसी), रुद्रपुर (देवरिया), तमकुही राज(कुशीनगर), नौतनवा, फरेंदा(महाराजगंज), कटरा बाज़ार, मनकापुर (गोंडा), बांसी (सिद्धार्थनगर), मंझनपुर(कौशांबी), किदवई नगर(कानपूर), लखनऊ कैंट(लखनऊ) आदि सीटों पर भी कांग्रेस ने दावा ठोका है।
फ़िलहाल देखना है कि क्या इस महीने के अंत तक कांग्रेस और सपा के बीच सीटों का बंटवारा तय हो पाटा है या नहीं। चूंकि समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव लगातार लोगों से मिल रहे हैं और जगह जगह प्रेस कांफ्रेंस कर रहे हैं। उससे साफ़ है कि वे जल्द चुनावी बिगुल फूंकने की तैयारी है। ऐसी स्थति में सीटों का बंटवारा जितनी जल्द हो जायेगा उतना दोनों दलों को फायदा मिलेगा।
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