प्रशांत किशोर बांकीपुर सीट से लड़ेंगे उपचुनाव, पहली बार चुनावी मैदान में उतरेंगे ‘पीके’
नितिन नवीन के पिता नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा भी पटना पश्चिम सीट से बीजेपी के बड़े नेता और विधायक रहे थे। उनके निधन के बाद से इस पूरे शहरी क्षेत्र पर इस परिवार और बीजेपी की पकड़ बेहद मजबूत रही है
पटना। चुनावी रणनीतिकार से राजनेता बने जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर (PK) अब प्रत्यक्ष रूप से चुनावी राजनीति में कदम रखने जा रहे हैं। जन सुराज पार्टी ने रविवार (5 जुलाई) को आधिकारिक तौर पर ऐलान कर दिया है कि प्रशांत किशोर बिहार की हाई-प्रोफाइल बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाले आगामी उपचुनाव में पार्टी के उम्मीदवार होंगे।
जन सुराज पार्टी के बिहार प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती ने कोर कमेटी की महत्वपूर्ण बैठक के बाद प्रशांत किशोर के नाम की विधिवत घोषणा की। पार्टी के इस फैसले के बाद बिहार के सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है।
नितिन नवीन के इस्तीफे से खाली हुई है सीट
पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट पर उपचुनाव इसलिए हो रहा है क्योंकि यहां से लगातार विधायक रहे बीजेपी के दिग्गज नेता नितिन नवीन हाल ही में राज्यसभा के लिए चुने गए हैं। राज्यसभा सदस्य बनने के बाद उन्होंने विधानसभा सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। निर्वाचन आयोग (ECI) के कार्यक्रम के मुताबिक, इस सीट पर 30 जुलाई, 2026 को मतदान होगा, जबकि वोटों की गिनती 3 अगस्त को की जाएगी।
चुनावी कार्यक्रम:
नामांकन की आखिरी तारीख: 13 जुलाई, 2026
नामांकन पत्रों की जांच: 14 जुलाई, 2026
नाम वापसी की अंतिम तिथि: 16 जुलाई, 2026
मतदान: 30 जुलाई, 2026
नतीजे: 3 अगस्त, 2026
“बीजेपी को हराएं, दिल्ली तक पहुंचेगा संदेश” – प्रशांत किशोर
उम्मीदवारी के ऐलान के बाद बांकीपुर में जनता को संबोधित करते हुए प्रशांत किशोर ने सीधा हमला भारतीय जनता पार्टी और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर बोला। पीके ने वोटरों से अपील करते हुए कहा कि यह उपचुनाव बिहार की दशा बदलने का एक बड़ा जरिया बन सकता है।
बदलाव की अपील करते हुए प्रशांत किशोर ने कहा,”अगर बांकीपुर के मतदाता यहां भाजपा को हरा देते हैं, तो दिल्ली में बैठे भाजपा नेतृत्व (पीएम मोदी) तक यह सीधा संदेश जाएगा कि बिहार की जनता वर्तमान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के कामकाज और व्यवस्था से खुश नहीं है। आपके पास इस समय एनडीए को जवाब देने का सबसे बड़ा मौका है।”
बांकीपुर सीट का क्या है इतिहास:
बांकीपुर सीट के गठन के बाद से लेकर अब तक यहां केवल और केवल भारतीय जनता पार्टी (BJP) का ही परचम लहराया है। साल 2010 के पहले चुनाव से लेकर 2020 के विधानसभा चुनाव तक, बीजेपी के दिग्गज नेता नितिन नवीन यहां से लगातार 4 बार विधायक चुने गए (2010, 2015, 2020 और 2025)।
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नितिन नवीन के पिता नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा भी पटना पश्चिम सीट से बीजेपी के बड़े नेता और विधायक रहे थे। उनके निधन के बाद से इस पूरे शहरी क्षेत्र पर इस परिवार और बीजेपी की पकड़ बेहद मजबूत रही है।
बांकीपुर सीट साल 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान पूरे देश की सुर्खियों में आ गई थी। उस वक्त यहां एक बेहद दिलचस्प त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिला था:
नितिन नवीन (BJP):
तत्कालीन सीटिंग विधायक
लव सिन्हा (Congress):
बॉलीवुड अभिनेता और राजनेता शत्रुघ्न सिन्हा के बेटे, जिन्हें कांग्रेस ने महागठबंधन की तरफ से मैदान में उतारा था।
पुष्पम प्रिया चौधरी (Plurals Party):
लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से पढ़ीं पुष्पम प्रिया चौधरी ने खुद को बिहार के मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया था और इसी सीट से चुनाव लड़ा था।
2020 का चुनावी नतीजा:
इस हाई-प्रोफाइल मुकाबले में भी बीजेपी के नितिन नवीन ने एकतरफा जीत हासिल की थी। उन्होंने कांग्रेस के लव सिन्हा को लगभग 39,000 से अधिक वोटों के भारी अंतर से हराया था, जबकि पुष्पम प्रिया चौधरी अपनी जमानत भी नहीं बचा पाई थीं।
बांकीपुर का सामाजिक और जातीय समीकरण
बांकीपुर पूरी तरह से एक शहरी (Urban) विधानसभा क्षेत्र है, जिसमें पटना नगर निगम के कई प्रमुख वार्ड आते हैं। कायस्थ और सवर्ण बहुल: इस सीट पर पारंपरिक रूप से कायस्थ (Kayastha) मतदाताओं की संख्या सबसे अधिक और निर्णायक मानी जाती है। इसके अलावा भूमिहार, राजपूत और ब्राह्मण मतदाताओं की भी अच्छी खासी आबादी है। सवर्ण मतदाताओं के इसी भारी झुकाव के कारण इसे बीजेपी का सबसे सुरक्षित गढ़ माना जाता है।
शहरी इलाका होने के कारण यहां वैश्य (व्यापारी वर्ग) और मध्यम वर्ग के नौकरीपेशा मतदाताओं की संख्या बहुत ज्यादा है, जो आम तौर पर भाजपा के कोर वोटर माने जाते हैं।
अल्पसंख्यक और दलित मतदाता: क्षेत्र में मुस्लिम और दलित मतदाताओं की भी उपस्थिति है, जो मुख्य रूप से विपक्षी दलों (कांग्रेस/आरजेडी) को वोट करते आए हैं, लेकिन वे जीत-हार तय करने वाले बहुमत में नहीं बदल पाते।
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