पहले पैकेज और अब भारत रत्न की नई मांग से नायडू ने बढ़ाई बीजेपी की मुश्किलें
मोदी सरकार 3.0 के बैसाखी बने चंद्रबाबू नायडू के इस ‘डबल अटैक’ ने केंद्रीय गलियारों में सियासी हलचल तेज कर दी है। माना जा रहा है कि फ़िलहाल चंद्रबाबू नायडू की नई मांग से बीजेपी थोड़ी असहज हो गई है
नई दिल्ली। केंद्र की राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) सरकार में किंगमेकर की भूमिका निभा रहे आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री और तेलुगु देशम पार्टी (TDP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एन. चंद्रबाबू नायडू ने एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के शीर्ष नेतृत्व को धर्मसंकट में डाल दिया है।
पहले आंध्र प्रदेश के लिए भारी-भरकम ‘विशेष वित्तीय पैकेज’ और विशेष दर्जे की मांग, और अब पार्टी के वार्षिक सम्मेलन ‘महानडू’ में टीडीपी संस्थापक एनटी रामाराव (NTR) को देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ (Bharat Ratna) देने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित कर नायडू ने भाजपा के सामने दोहरी राजनीतिक चुनौती खड़ी कर दी है।
मोदी सरकार 3.0 के बैसाखी बने चंद्रबाबू नायडू के इस ‘डबल अटैक’ ने केंद्रीय गलियारों में सियासी हलचल तेज कर दी है। माना जा रहा है कि फ़िलहाल चंद्रबाबू नायडू की नई मांग से बीजेपी थोड़ी असहज हो गई है।
विशेष पैकेज से लेकर भारत रत्न तक: नायडू ने कैसे फंसाया पेंच?
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, चंद्रबाबू नायडू की यह रणनीतिक मांगें केवल भावुकता या क्षेत्रीय प्रेम नहीं हैं, बल्कि केंद्र सरकार पर अपना दबाव बनाए रखने और राज्य में अपनी पकड़ मजबूत करने की एक सोची-समझी क्रोनोलॉजी है।
1. विशेष राज्य का दर्जा और वित्तीय पैकेज का दबाव
लोकसभा चुनावों के बाद से ही चंद्रबाबू नायडू आंध्र प्रदेश के विकास और नई राजधानी ‘अमरावती’ के निर्माण के लिए केंद्र सरकार से विशेष पैकेज और धन आवंटन की निरंतर मांग कर रहे हैं। चूंकि केंद्र में सरकार टीडीपी (16 सांसद) के समर्थन पर टिकी है, इसलिए भाजपा इस मांग को नजरअंदाज नहीं कर पा रही है। इसके चलते अन्य सहयोगी दल (जैसे बिहार में जदयू) और विपक्ष शासित राज्य भी अपने लिए विशेष पैकेज की मांग उठाने लगे हैं, जिससे केंद्रीय बजट और खजाने पर भारी दबाव है।
2. ‘तेलुगु अस्मिता’ का दांव और भाजपा की दुविधा
विशेष पैकेज की चर्चाओं के बीच अब नायडू ने एनटीआर की 103वीं जयंती पर उन्हें ‘भारत रत्न’ देने का प्रस्ताव पारित कर दिया है। एनटीआर को आंध्र प्रदेश में ‘तेलुगु स्वाभिमान’ और भगवान की तरह पूजा जाता है।
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3. भाजपा की मुश्किल
यदि भाजपा इस मांग को स्वीकार करती है, तो इसका पूरा राजनीतिक माइलेज चंद्रबाबू नायडू और टीडीपी को मिलेगा। यदि केंद्र सरकार इसे ठुकराती या टालती है, तो आंध्र प्रदेश में संदेश जाएगा कि भाजपा ‘तेलुगु अस्मिता’ का सम्मान नहीं करती, जिससे राज्य में भाजपा का आधार पूरी तरह खत्म हो सकता है।
4. इतिहास की राजनीति
दिलचस्प बात यह है कि हाल के समय में केंद्र सरकार ने कर्पूरी ठाकुर, लालकृष्ण आडवाणी, चौधरी चरण सिंह, और दक्षिण भारत से पूर्व पीएम पीवी नरसिम्हा राव व एमएस स्वामीनाथन जैसी हस्तियों को भारत रत्न दिया है। नरसिम्हा राव (जो आंध्र से थे) को भारत रत्न देकर भाजपा ने जो दांव चला था, चंद्रबाबू नायडू ने अब एनटीआर की मांग उठाकर उस क्षेत्रीय कार्ड को पूरी तरह टीडीपी के पाले में खींच लिया है।
“दुनियाभर के तेलुगु लोगों की इच्छा है यह सम्मान”
‘महानडू’ सम्मेलन में प्रस्ताव पेश करते हुए चंद्रबाबू नायडू ने बेहद आक्रामक और भावनात्मक अंदाज में कहा:
“एनटीआर केवल एक राजनेता या अभिनेता नहीं थे, वे तेलुगु लोगों की पहचान थे। उन्होंने महज 9 महीने में पार्टी बनाकर सत्ता हासिल की और राष्ट्रीय राजनीति में क्षेत्रीय दलों को उनका हक दिलाया। उन्हें भारत रत्न देना वैश्विक स्तर पर फैले करोड़ों तेलुगु भाषियों का सम्मान होगा।”
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