चुनाव आयोग को सीजेपी का 24 घंटे का अल्टीमेटम: 2 अक्टूबर से देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी
नई दिल्ली: कॉकरेच जनता पार्टी (CJP) ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से पद छोड़ने की मांग करते हुए 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया है। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने चेतावनी दी है कि यदि शनिवार तक इस्तीफा नहीं मिला, तो उनकी पार्टी 2 अक्तूबर (गांधी जयंती) से मुंबई में एक बड़ा देशव्यापी आंदोलन शुरू करेगी। दीपके ने लोगों से लोकतंत्र की रक्षा के लिए इस आंदोलन से जुड़ने की अपील की है जिसे बाद में देश के अन्य हिस्सों में भी ले जाने की योजना है।
इलेक्शन कमीशन ठीक करो’ अभियान
विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और मतदाता सूचियों से बड़े पैमाने पर नाम काटे जाने के दावों को लेकर चुनाव आयोग के खिलाफ मुखर होते हुए सीजेपी (CJP) ने ‘इलेक्शन कमीशन ठीक करो’ अभियान की शुरुआत की है, जिसके तहत संस्था के संस्थापक अभिजीत दीपके ने आरोप लगाया है कि देश के 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एसआईआर के दौरान ड्राफ्ट मतदाता सूचियों से 13 करोड़ से अधिक नाम बाहर किए गए हैं
और अकेले महाराष्ट्र व उत्तर प्रदेश में दो-दो करोड़, कर्नाटक में एक करोड़, तमिलनाडु में 97 लाख, पश्चिम बंगाल में 90 लाख, तेलंगाना में 73 लाख, दिल्ली में 47 लाख तथा केरल में 24 लाख मतदाताओं के नाम प्रभावित हुए हैं।
तथा चेतावनी दी है कि यदि संतोषजनक स्पष्टीकरण या इस्तीफा नहीं दिया गया, तो 2 अक्तूबर से मुंबई से राष्ट्रव्यापी आंदोलन की शुरुआत करते हुए दिल्ली में ‘जंतर-मंतर 2.0’ के तहत अनिश्चितकालीन धरना दिया जाएगा।
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आयोग में विवाद के बीच सीजेपी का अल्टीमेटम
सीजेपी का यह तीखा विरोध ऐसे समय में सामने आया है जब चुनाव आयोग के भीतर दो चुनाव आयुक्तों (सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी) द्वारा एसआईआर और मतदाता सूची से जुड़े फैसलों पर 14 बार आपत्तियां दर्ज कराने की खबरें सुर्खियों में हैं, हालांकि चुनाव आयोग का यह स्पष्ट करना है कि तीन सदस्यीय संस्था के भीतर आंतरिक चर्चा और अलग-अलग राय एक सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा रही है और सभी अंतिम निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए हैं।
सीजेपी संस्थापक अभिजीत दीपके ने विपक्षी दलों को नसीहत देते हुए कहा है कि अगर उन्हें चुनाव प्रक्रिया पर शक है तो उन्हें ऐसे चुनावो का पूरी तरह बहिष्कार करना चाहिए। उनका मानना है कि गड़बड़ी के बावजूद चुनाव में हिस्सा लेने से गलत व्यवस्था को समाज में मंजूरी मिल जाती है।
इसके साथ ही उन्होंने विपक्ष के दोहरे रवैये पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि वे चुनावी गड़बड़ी का मुद्दा अपनी सुविधा के अनुसार उठाते हैं; जबकि धांधली के खिलाफ आवाज बिना किसी राज्य या राजनीतिक दल का भेदभाव किए हर जगह एक समान रूप से उठनी चाहिए।
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