TMC केस में कोर्ट की सख्ती, चुनाव आयोग से मांगी अंतिम फैसले की तारीख
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से पूछा है कि वह TMC के नाम और चुनाव चिह्न को फ्रिज करने के मामले में कब तक अपना आखिरी फैसला सुनाएगा।
पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग के इस अंतरिम फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। अब देश की सबसे बड़ी अदालत इस पुरे मामले पर 28 सितंबर 2026 को अगली सुनवाई करेगी।
पार्टी के नाम और सिंबल के बंटवारे पर ममता गुट ने जताई चिंता
आयोग के इस फैसले के तहत ममता बनर्जी गुट को ‘ममता टीएमसी’ नाम और ‘फुटबॉल प्लेयर’ चुनाव चिह्न आवंटित किया गया है, जबकि बागी गुट को ‘डेमोक्रेटिक टीएमसी’ नाम और ‘लिफाफा’ चुनाव चिह्न दिया गया है।
ममता गुट का तर्क है कि यदि चुनाव आयोग ने इस मामले पर जल्द कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया, तो आगामी नवंबर महीने में होने वाले कॉरपोरेशन चुनाव की पूरी प्रक्रिया गंभीर रूप से प्रभावित हो सकती है।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने इस मामले की गंभीरता को समझा।
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ममता गुट की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने दलील दी कि वे चुनाव टालने की मांग नहीं कर रहे हैं, बल्कि पार्टी के मूल नाम और चुनाव चिह्न को बनाए रखने की अनुमति चाहते हैं, क्योंकि यह उनके राजनीतिक अस्तित्व का सीधा सवाल है।
उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव के ठीक बीच में इस तरह सिंबल बदलना एक ऐसी मिसाल कायम कर रहा है जो भविष्य के चुनावों के लिए भी चिंताजनक है।
जस्टिस बागची का कहना है कि इस मामले का सबसे सही समाधान यही है कि चुनाव आयोग बिना किसी देरी के जल्द से जल्द अपना फैसला सुनाए।
आयोग ने यह शुरुआती फैसला आने वाले उपचुनावों को देखते हुए लिया था, लेकिन अब सबकी नजरें 28 सितंबर को होने वाली अगली सुनवाई पर है कि अदालत इस विवाद को सुलझाने के लिए क्या आदेश देती है।
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