धार भोजशाला विवाद: हाई कोर्ट ने माना मंदिर, सुप्रीमकोर्ट जायेगा मुस्लिम पक्ष
भोपाल। मध्य प्रदेश के धार में स्थित विवादित भोजशाला-कमल मौला मस्जिद परिसर को लेकर इंदौर हाई कोर्ट की खंडपीठ ने अपना महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की सर्वे रिपोर्ट को स्वीकार करते हुए भोजशाला को हिंदू पक्ष के दावों के अनुरूप मंदिर माना है।
हाई कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि उपलब्ध साक्ष्यों, वैज्ञानिक सर्वे और ऐतिहासिक दस्तावेजों के आधार पर यह प्रमाणित होता है कि यह मूलतः एक हिंदू धार्मिक स्थल है। कोर्ट ने हिंदू पक्ष को परिसर में नियमित पूजा-अर्चना का अधिकार देने के साथ-साथ परिसर के प्रबंधन के लिए ट्रस्ट गठित करने के निर्देश दिए हैं।
धार के भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद विवाद में हिंदू पक्ष ने तर्क दिया कि इस परिसर का निर्माण मूल रूप से 1034 ईस्वी में राजा भोज द्वारा देवी सरस्वती के मंदिर के रूप में किया गया था। उनके दावे के अनुसार, 1305 ईस्वी में अलाउद्दीन खिलजी के आक्रमण के दौरान इस मंदिर को ध्वस्त कर दिया गया और उसी मलबे व स्तंभों का उपयोग करके वहाँ मस्जिद खड़ी कर दी गई।
इससे पहले इस मामले में इंदौर हाईकोर्ट की डबल बेंच ने पांच याचिकाओं और तीन इंटरवेंशन पर सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रखा था। इस फैसले का आधार एएसआई की वह विस्तृत सर्वे रिपोर्ट बनी है जिसमें परिसर के नीचे एक विशाल मंदिर संरचना होने और वर्तमान ढांचे के निर्माण में मंदिर के अवशेषों जैसे खंभों, मूर्तियों और शिलालेखों के उपयोग की बात कही गई थी। कोर्ट ने माना कि यह स्थान राजा भोज द्वारा निर्मित सरस्वती मंदिर (वाग्देवी मंदिर) है।
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वहीं दूसरी ओर मुस्लिम पक्ष (मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसाइटी) ने हाई कोर्ट के इस फैसले पर कड़ी असहमति जताई है। मुस्लिम पक्ष का कहना है कि वे इस निर्णय को स्वीकार नहीं करते और इसके खिलाफ जल्द ही सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर करेंगे। फैसले के बाद धार जिले में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए पूरी तरह सतर्क और हाई अलर्ट पर हैं।
मुस्लिम पक्ष ने पूरी सुनवाई के दौरान एएसआई की रिपोर्ट को पक्षपातपूर्ण बताया था और आरोप लगाया था कि सर्वे में निष्पक्षता नहीं बरती गई। मुस्लिम समाज के वकीलों का तर्क है कि यह स्थल सदियों से मस्जिद के रूप में उपयोग किया जा रहा है और एएसआई ने उनके धार्मिक स्थलों के अधिकारों की अनदेखी की है।
गौरतलब है कि अब तक की व्यवस्था के अनुसार एएसआई के 2003 के आदेश के तहत हिंदुओं को मंगलवार को पूजा और मुस्लिमों को शुक्रवार को नमाज की अनुमति थी। अब हाई कोर्ट के इस नए आदेश के बाद जहां हिंदू पक्ष में खुशी की लहर है, वहीं कानूनी लड़ाई अब देश की शीर्ष अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचने वाली है। प्रशासन ने क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं।
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